18वीं सदी के दौरान जब औद्योगिक क्रांति शुरू हुई तो पश्चिमी देशों में बहुत ही तेजी से जनसंख्या वृद्धि शुरू हो गई थी। इस जनसंख्या वृद्धि के कारण को जानने के लिए ब्रिटिश वैज्ञानिक थॉमस मैककियोन (1912-1988) ने खोज शुरू किया था। उसने इस खोज से प्राप्त जानकारी का प्रकाशन मॉडर्न राइज़ ऑफ पॉप्युलेशन में किया।
बढती जनसंख्या हमारे देश के विकास क्रम में अवरोधक होने के साथ ही हमारे आम जन जीवन को भी दिन-प्रतिदिन प्रभावित कर रही है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या 2024 तक चीन की भारी आबादी को पीछे छोड़कर काफी आगे निकल जायेगी। सन 2100 तक भारत दुनिया का सबसे बडी जनसंख्या वाला देश बन जायेगा।
संयुक्त राष्ट्र के जनसंख्या पुनरिक्षण 2017 के एक अनुमान के अनुसार भारत की आबादी 2030 में 1.5 बिलियन हो जायेगी। अभी चीन की आबादी 1.41 बिलियन के लगभग है और भारत की जनसंख्या 1.34 बिलियन हैं। इन दोनों देशों में दुनिया की सबसे ज्यादा 18-19 प्रतिशत मानव बसाव रहती है।
चीन के मुकाबले भारत की ये बढ़ती हुई जनसंख्या की खबर सुनकर हम खुश तो हो सकते हैं परंतु ये आगे चलकर एक गंभीर समस्या बनेगी। यदि आंकडों के अनुसार देखे तो आजादी के समय भारत की जनसंख्या 34 करोड़ थी जो जनसंख्या सर्वेक्षण रिर्पोट 2011 के मुताबिक भारत की आबादी बढकर लगभग 121.5 करोड़ हो गई है तथा साल 2017 तक हमारे देश की कुल आबादी लगभग 133 करोड़ से अधिक आंकी जा रही है।
देश की कुल आबादी में 62.31 करोड़ जनसंख्या पुरुषों की व 58.47 करोड़ जनसंख्या महिलाओं की है। सर्वोधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहां की कुल आबादी 19.98 करोड़ है तो वहीं न्यूनतम आबादी वाला राज्य सिक्किम है जहां की कुल आबादी लगभग 6 लाख है।
हमारे देश में बढती जनसंख्या के कारण भारी मात्रा में खाद्यान्न संकट उत्पन्न हो रहा है। अलबत्ता जिसके कारण देश में भूखमरी, पानी व बिजली की समस्या, आवास की समस्या, अशिक्षा का दंश, चिकित्सा की बदइंतजामी व रोजगार के कम होते विकल्प इत्यादि प्रकार की समस्याओं से जूंझना पड रहा है।
हमारे देश में विशाल होती जनसंख्या का एक कारण पुरुषवादी मानसिकता का होना भी है। घर चलाने व वंश की पहचान के तौर पर बेटे के इंतजार में बेटियों की संख्या में वृद्धि कर लंबा-चौड़ा परिवार बढाया जाता है। वहीं सरकार द्वारा निर्धारित उम्र से कम उम्र में बालविवाह कराये जाने से भी जनसंख्या का भार बढ रहा है। देश की अधिकांश आबादी निरक्षर होने के कारण वे देश व अर्थव्यवस्था पर पड रहे जनसंख्या के प्रतिकूल प्रभावों से अछूते ही रहते है।
यह सच है कि आज कई राज्यों की राज्य सरकारे इस विषय को गंभीर हुई है। जिसके परिणामस्वरूप असम की राज्य सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए दो से अधिक संतान वाले लोगों को सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य करार दिया। वहीं राजस्थान सरकार ने शगुन में निरोध देने जैसे योजनाओं को संचाालित कर जनसंख्या नियंत्रण में योगदान किया। ध्यान रहे कि बढती जनसंख्या पर अंकुश और देश का विकास दोनों ही आम जनता और सरकार के हाथों में है।