रॉलेट कानून के विरूद्ध सत्याग्रह

दूसरे राष्ट्रवादियों की तरह गांधीजी को भी इस कानून के पारित होने से गहरा धक्का लगा, उन्होंने फरवरी 1919 में रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए एक सत्याग्रह सभा बनाई जिसके अध्यक्ष वे स्वयं थे। इस सभा में शंकर लाल बैंकर, उमा शोभनी तथा डी.डी. साम्ये थे। 

गांधीजी के नेतृत्व में 30 मार्च 1919 की तिथि एक अखिल भारतीय सत्याग्रह आंदोलन के लिए निर्धारित की गई। हालांकि बाद में इस तिथि को 6 अप्रैल कर दिया गया। आंदोलन की तिथि बदलने की जानकारी सभी स्थानों पर नहीं हो पाई। इसलिए दिल्ली में  30 मार्च को ही हड़ताल हो गई पुनः 6 अप्रैल को पूरे देश में हड़ताल हुई।

रॉलेट सत्याग्रह की मुख्य विशेषता रही की कार्यकर्ताओं के दबाव में केंद्रीय तथा प्रांतीय प्रशासन के संपर्क सूत्र भंग हो गए। प्रांतीय सरकारों को अपने स्वविवेक पर कदम उठाना पड़ा यही कारण है कि विभिन्न प्रांतों में आंदोलन के विरूद्ध सरकारी प्रतिक्रिया भी भिन्न भिन्न रही।

जहां पंजाब में गवर्नर माइकल ओ डायर ने शांतिपूर्ण जुलूसों पर भारी अत्याचार किया तो वहीं बंबई के गवर्नर जार्ज लौयड ने भीड़ के हिंसक होने के बावजूद संयम का सहारा लिया।

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