बंगाल में क्रांतिकारी आंदोलन (II)

क्रांतिकारी हिंसक घटनाओं का आरंभ 1906 में हुआ, जब धन की व्यवस्था के लिए क्रांतिकारियों ने डकैतियों की योजना बनाई। 1907 में पूर्वी बंगाल तथा बंगाल के लेफ्टिनेंट गवर्नरों की हत्याओं के असफल प्रयत्न किए गए। प्रफुल्ल चाकी तथा खुदीराम बोस ने 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरनगर में न्यायाधीश श्री किंजफॉर्ड की हत्या का प्रयास किया, परन्तु गलती से बम श्री कनेदी की गाड़ी पर गिर गया जिससे दो महिलाओं की मृत्यु हो गई। प्रफुल्ल चाकी तथा बोस पकड़े गए। चाकी ने आत्महत्या कर ली तथा बोस को फांसी की सजा दी गई।

क्रांतिकारियों की इस पीढ़ी में बंगाल में हेमचंद कानूनगो सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। जनवरी 1906 ई. में वे पेरिस में स्वदेश लौटे थे। मणिकतल्ला के एक धार्मिक पाठशाला में उन्होंने बम बनाने का कारखाना स्थापित किया था। परन्तु खुदीराम बोस तथा प्रफुल्ल चाकी के बम फेंकने की घटना के कुछ देर पश्चात वारिंद्र घोस की लापरवाही से बम बनाने वाला पूरा समूह पकड़ा गया। इन लोगों पर अलीपुर षड्यंत्र केस चलाया गया। इस मुकदमे में अरविंद घोष को रिहा कर दिया गया परन्तु नरेंद्र गोसाई जो कि सरकारी गवाह बन गए थे कि हत्या ' कन्हाई लाल दत्त ' तथा सत्येन्द्र वोस ने गोली मारकर कर दी।

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