वेनेज़ुएला में किसी सामान या सुविधा के बदले दूसरा सामान देने की व्यवस्था आज भी वेनेजुएला में चल रही है। दरअसल इसकी वजह है कि वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था इस वक्त बहुत खराब दौर से गुजर रही है। वेनेजुएला के बैंकों से इस वक्त करंसी निकालना उतना ही मुश्किल काम है जितना किसी दुर्लभ दवाई को हासिल करना। मुद्रा की कमी के कारण बड़े तौर पर अर्थव्यवस्था बार्टर सिस्टम पर आधारित है। बता दे, कभी लातिन अमेरिकी देशों में वेनेजुएला की गिनती सबसे समृद्ध मुल्क के तौर पर होती थी। वेनेजुएला के पास पर्याप्त तेल के भंडार हैं, लेकिन तब भी वहां की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है। पलायन को मजबूर तेल संपदा से भरपूर इस देश में जनता पैसे, खाना और मूलभूत जरूरतों को भी पूरा कर पाने में असमर्थ है। खराब आर्थिक हालात के कारण 2015 से 2017 के बीच देश की कुल आबादी के 3 फीसदी लोगों को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ा। कैश नहीं होने के कारण लोग बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बार्टर सिस्टम पर आश्रित हैं। अमेरिका के साथ चल रहे ट्रेड वॉर जैसे हालात के कारण भी वेनेजुएला को मुश्किल हालात झेलने पड़ रहे हैं। वेनेजुएला के आर्थिक संकट पर विशेषज्ञों की राय है कि महंगाई बेहिसाब बढ़ी, लेकिन देश में उसेक अनुपात में कैश का इंतजाम नहीं हो सका। राष्ट्रीय बैंक कैश की किल्लत को दूर नहीं कर पाए जिसके कारण आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां लगातार बढ़ती चली गईं। हालाँकि अभी 23 अगस्त को देश को आर्थिक मुश्किल से निकालने के लिए वेनेज़ुएला की सरकार ने पुराने नोट की जगह नए नोट जारी कर दिए हैं। मगर ये क़दम कारगर होगा, इसे लेकर अनिश्चय बना हुआ है. सरकार उत्साहित है, तो विपक्ष हड़ताल की तैयारी कर रहा है।