खिलाफत आंदोलन

जलियांवाला बाग हत्याकांड उस समय हुआ था जब भारतीय मुसलमान सर्व - इस्लामिक खिलाफत मुद्दे को लेकर अत्यधिक उत्तेजित थे। यह प्रश्न प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटेन के खिलाफ जर्मनी के मित्र रूप में तुर्की के प्रवेश के कारण उत्पन्न हुआ था। विशाल ऑटोमन साम्राज्य का शासक तुर्की का सुल्तान पूरे इस्लामी जगत का खलीफा था। प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की पराजय हुई, ऑटोमन साम्राज्य विघटित हो गया और तुर्की के सुल्तान को अपने शेष प्रदेशों में भी अपनी सत्ता के प्रयोग करने से वंचित कर दिया गया, क्योंकि उसे मित्र शक्तियों द्वारा नियुक्त एक उच्चायोग के पूर्णतया अधीन कर दिया गया था।

महात्मा गांधी की सहानुभूति और समर्थन के कारण यह खिलाफत आंदोलन और अधिक शक्तिशाली बन गया। नवंबर 1919 में महात्मा गांधी को अखिल भारतीय खिलाफत सम्मेलन का अध्यक्ष चुना गया। दिसंबर 1919 में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अमृतसर अधिवेशन से खिलाफत आंदोलन को और अधिक बढ़ावा मिल गया।

खिलाफतियो ने एक त्रिस्तरीय कार्यक्रम तैयार किया:      (1) ऑटोमन खलीफा को पर्याप्त लौकिक अधिकारों के साथ अपने साम्राज्य में सत्तारूढ़ रहने दिया जाए, जिससे की वह मुसलमान की रक्षा कर सकें।                (2) अरब प्रदेशों को मुस्लिम शासन के अधीन होना चाहिए और  (3) तुर्की के सुल्तान को मुसलमानों के पवित्र स्थलों पर संरक्षक बनाया जाए। 17 अक्टूबर 1919 को अखिल भारतीय स्तर पर तथा बड़े प्रभावशाली ढंग से ' खिलाफत आंदोलन ' बनाया गया।

Posted on by