जीवाणुओं के पूर्वज वे एक कोशिकीय सूक्ष्मजीव थे, जिनकी उत्पत्ति 40 करोड़ वर्षों पूर्व पृथ्वी पर जीवन के प्रथम रूप में हुई। लगभग 30 करोड़ वर्षों तक पृथ्वी पर जीवन के नाम पर सूक्ष्मजीव ही थे। इनमें जीवाणु तथा आर्किया मुख्य थे। स्ट्रोमेटोलाइट्स जैसे जीवाणुओं के जीवाश्म पाये गए हैं परन्तु इनकी अस्पष्ट बाह्य संरचना के कारण जीवाणुओं को समझने में इनसे कोई खास मदद नहीं मिली।
बैक्टीरिया एक कोशिकीय जीवाणु होते है | जिन्हें खुली आँखों से नहीं देखा जा सकता | इन्हें देखने के लिए माइक्रोस्कोप का प्रयोग किया जाता है | ये हमारे आसपास वायु में , जमीन पर और यहाँ तक की हमारे भोजन में भी पाए जाते है | ये हमारी त्वचा पर , जुबान पर , पेट में , आंतो में , मुहं में भी उपस्थित रहते है |
जीवाणुओं को सबसे पहले डच वैज्ञानिक एण्टनी वाँन ल्यूवोनहूक ने 1676 ई. में अपने द्वारा ही बनाए गए एकल लेंस सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखा, पर उस समय उसने इन्हें जंतुक समझा था। उसने रायल सोसाइटी को अपने अवलोकनों की पुष्टि के लिए कई पत्र लिखे।1676 ई. में ल्यूवेनहॉक ने जीवाणु का चित्रण कर अपने मत की पुष्टि की। 1764 ई. में फ्रांसनिवासी लूई पाश्चर तथा 1790 ई. में कोच ने यह मत व्यक्त किया कि इन जीवाणुओं से रोग फैलते हैं। पाश्चर ने 1979 में प्रयोगो द्वारा यह दिखाया कि किण्वन की रासायनिक क्रिया सूक्ष्म जीवों द्वारा होती है। कोच सूक्ष्मजैविकी के क्षेत्र में युगपुरूष माने जाते हैं, इन्होंने कॉलेरा, ऐन्थ्रेक्स तथा क्षय रोगो पर गहन अध्ययन किया। अंततः कोच ने यह सिद्ध कर दीया कि कई रोग सूक्ष्म जीवों के कारण होते हैं। इसके लिए 1905 ई. में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।कोच न रोगों एवं उनके कारक जीवों का पता लगाने के लिए कुछ परिकल्पनाएं की थी जो आज भी इस्तेमाल होती हैं। जीवाणु कई रोगों के कारक हैं यह १९वीं शताब्दी तक सभी जान गए, परन्तु फिर भी कोई प्रभावी प्रतिजैविकी की खोज नहीं हो सकी। सबसे पहले प्रतिजैविकी का आविष्कार 1910 में पॉल एहरिच ने किया। जिससे सिफलिस रोग की चिकित्सा संभव हो सकी। इसके लिए 1907 ई. में उन्हें चिकित्साशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। इन्होंने जीवाणुओं को अभिरंजित करने की कारगर विधियां खोज निकाली, जिनके आधार पर ग्राम स्टेन की रचना संभव हुई।
ये सभी हानिकारक या बीमार पैदा करने वाले नहीं होते, अधिकांश बैक्टीरिया हमारे लिए एवं प्रकृति के लिए लाभदायक होते है | जैसे हमारी आंतो में रहने वाले Bacteria रोगजनक जीवाणुओं को खत्म करके हमारे शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक होते है | साथ ही शरीर में एंजाइम और विटामिनों के पोषण और निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते है |