प्राचीन भारतीय इतिहास-41 मेगस्थनीज

मेगस्थनीज

      मेगस्थनीज के अनुसार नगर का प्रशासन 30 सदस्यों का एक मंडल करता था जो 6 समितियों में विभक्त था। प्रत्येक समिति में 5 सदस्य होेते थे।

      बिक्रीकर के रूप में मूल्य का 10वाँ भाग लिया जाता था तथा इसे चोरी करने वाले को मृत्यु दण्ड दिया जाता था।

      मेगास्थनीज के अनुसार एग्रोनोमोई नाम अधिकारी मार्ग निर्माण के लिए उत्तरदायी था।

      युद्व क्षेत्र मंे सेना का नेतृत्व करने वाला अधिकारी नायक कहलाता था।

      सैन्य विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी सेनापति होता था।

      बिना वर्षा के खेती होने वाली कृषि भूमि को अदेवमातृक कहा जाता था।

      अशोक के कन्दहार अभिलेख से ज्ञात होता है कि उसकी शान्ति नीति बहेलियों एवं मछुआरों पर लागू होती थी।

      मेगास्थनीज ने भारतीय समाज को सात वर्गो में विभाजित किया है।

      चन्द्रगुप्त मौर्य के राजप्रासाद का वर्णन एरियन ने किया है तथा उसे सूसा और एकवेतना से भी सुन्दर बताया हैं।

      चैथी शताब्दी ई0 में भारत आये चीनी बौद्ध यात्री फाह्यान ने मौर्य राजप्रसान को देवदूतांे द्वारा निर्मित बताया।

-शेष अगले भाग में

Posted on by