प्राचीन भारतीय इतिहास-42 शुुंग वंश

शुुंग वंश

      शुंग वंश की स्थापना 1850पू0 मंे मौर्य सेनापति पुष्पमित्र शंुग ने अन्तिम मौर्य शासक बृहद्रथ की हत्या करके की।

      शुंग शासकों की राजधानी पाटलिपुत्र थी। पुष्यमित्र शुंग कट्टर ब्राह्मणवादी था।

      पुष्यमित्र शंुग के समय में यवन शासक डेमेट्रियस का आक्रमण हुआ, जिसको पुष्यमित्र ने पराजित कर दिया।

      पुष्यमित्र शुंग ने दो अश्वमेघ यज्ञ किये थे। इसका उल्लेख धनदेव के अयोध्या अभिलेख में मिलता है। सुप्रसिद्ध संस्कृत वैयाकरण पंतजलि उसके अश्वमेघ यज्ञ के पुराहित थे।

      भरहुत स्तूप का निर्माण पुष्पमित्र शंुग ने करवया था। भरहुत स्तूप की खोज 1873 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने किया था। साँची (विदिशा रायसेन जिला म0प्र0) में पुष्यमित्र ने दो स्तूप का निर्माण करवाया और अशोक कालीन महास्तूप (ईंटों का बना) की काष्ठवेदिका के स्थान पर पाषाण वेदिक निर्मित करवाया।

      देवभूति शंूग वंश का अन्तिम शासक था। इसके मंत्री वसुदेव ने इसकी हत्या कर कण्व वंश की स्थापना किया।

      मनुस्मृति के वर्तमान स्वरूप की रचना शंुग युग में हुयी।

-शेष अगले भाग में

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