अजातशत्रु का शासनकाल

अजातशत्रु भी अपने पिता की भांति  एक साम्राज्यवादी शासक था। क्योंकि उसने बिंदुसार की हत्या की थी ।इसलिए उसे कौशल नरेश प्रसनजीत के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रसनजीत महाकौशल आ देवी का भाई था महाकौशल देवी की इस समय तक मृत्यु हो चुकी थी। प्रसनजीत ने दहेज के रूप में प्रदान किए गए ।काशी को जब अपने कब्जे में करना चाहा तो अजातशत्रु के साथ उसके संघर्ष प्रारंभ हो गए अंततः दोनों में संधि स्थापित हुई ।प्रसनजीत ने ना सिर्फ काशी पूर्णतः अजातशत्रु को दिया बल्कि अपनी एक पुत्री वजीरा की शादी भी उसने अजातशत्रु के साथ कर दी।

अजातशत्रु का इसके बाद वैशाली के लिच्छीयों के साथ संघर्ष प्रारंभ हुआ। इस संघर्ष के कारण क्या थे इस संबंध में बौद्ध और जैन साहित्य में अलग-अलग विवरण मिलता है ।बौद्ध ग्रंथ के अनुसार गंगा नदी के समीप एक पहाड़ी के नीचे हीरो की एक खान प्राप्त किया जा सकता था ।वैशाली के लिच्छीयो के बीच इस बात से सहमत हूं कि यहां से प्राप्त हीरों को बराबर बराबर हिस्सों में बांट दिया ।जाएगा इस समझौते लि छियो ने उल्लंघन किया ।फलतः दोनों के बीच युद्ध प्रारंभ हो गए ।प्रसिद्ध जैन ग्रंथ के अनुसार इस संघर्ष का कारण चलाना के दो पुत्र हल्ल व बाहल्ल को बिंबसार  से मिले एक प्रसिद्ध हाथी सेयन्न तथा 18 लड़ियों वाले हीरे के एक हार को अजातशत्रु के द्वारा प्राप्त किए जाने की कोशिश थी । हल बहल भागकरअपने नाना चौक के पास चला गया था। जब शांतिपूर्ण तरीके से आजात शत्रु को यह चीजें प्राप्त ना हो सकी तोो लीीीहचीछछयों के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी।

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