यह दूसरा मंडल है जो क्षोभमंडल के ऊपर पाया जाता है। यह मंडल 50 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित है इस मंडल की ऊपरी भाग में ओजोन गैस अधिक मात्रा में पाई जाती है। समताप मंडल की ऊपरी स्थित क्षेत्र को ओजोन परत या ओजोन मंडल के नाम से भी जाना जाता है। यह पद 25 से 35 किलोमीटर औसत मोटाई में स्थित है जो सर्वाधिक 55 किलोमीटर ऊंचाई तक स्थित होती है। इसका निचला भाग 20 किलोमीटर ऊंचाई तक पाया जाता है। सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणें इस पद से या तो परिवर्तित हो जाती है या अवशोषित हो जाती है जिसके कारण ओजोन परत में तापमान वृद्धि होती है। उनके नीचे स्थित भाग में तापमान समान रहता है अर्थात 20 किलोमीटर ऊंचाई तक तापमान अपरिवर्तित रहता है इसलिए मंडल कहते हैं। परंतु उपस्थित होने के कारण समताप मंडल की ओर जाने पर 1 डिग्री सेल्सियस 200 मी अथवा 5 डिग्री सेल्सियस 1 किलो मीटर की दर से तापमान में वृद्धि होती है तथा 50 किलोमीटर ऊंचाई तक तापमान 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ओजोन परत को सर्वाधिक पहुंचने वाली गैस क्लोरीन होती है परंतु cl2 अवस्था में नहीं पाई जाती है। अत्यंत कम मात्रा में मेथिल क्लोराइड गैस भी क्षति पहुंचाती है इन जैसों की उपस्थिति में ओजोन ऑक्सीजन तथा नवजात ऑक्सीजन में विभक्त होती है जो पुनः संयोजित नहीं हो पाती। अतः इन क्षेत्रों में ओजोन परत का अभाव होने लगता है। जब ओजोन परत का अत्यधिक अभाव हो जाता है तो इन क्षेत्रों से सूर्य की पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह पर प्रवेश करने लगती हैं ऐसे ओजोन के अभाव वाले क्षेत्रों को ओजोन छिद्र के नाम से जाना जाता है। वह जून के टूटने ओजोन के कम होने की प्रक्रिया को ओजोन छरण या ओजोन रिक्तीकरण के नाम से जाना जाता है वह ओजोन परत को क्षति पहुंचाने वाली गैसों का उत्सर्जन प्रेषण यान, वायुयान, एसी, फ्रिज, सितारे, अग्निशमन यंत्र इत्यादि से होता है ।जब ओजोन परत में ओजोन गैस का अभाव ओजोन छिद्र का निर्माण में उत्सर्जित गैस के द्वारा होता है तो ऐसे ओजोन छिद्र को कहा जाता है तथा समताप मंडल के 3 किलोमीटर मोटाई में पाई जाती है जो छोभ मंडल समताप मंडल के द्वारा प्रदर्शित करते हैं इसे सीमा के नाम से जाना जाता है वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की सतह से 30 से 32 किलोमीटर ऊंचाई तक जीवित होता है। इस क्षेत्र को जैव मंडल के नाम से जाना जाता है।