इसी कारण ये प्रदेश शान्त पेटी के क्षेत्र कहलाते हैं।....से आगे...
वर्षा- दोपहर के समय घने मेघ छाए रहते हैं और वर्षा घोर गर्जन एवं चमक के साथ भारी बौछारों के रूप में होती है। यह वर्षा संवाहनिक वर्षा कहलाती है और प्रतिदिन ठीक समय पर दोपहर बाद चार बजे के आसपास होती है। यद्यपि यहाँ वर्षा साल भर प्रतिदिन होती है, किन्तु मार्च और सितम्बर में वर्षा अधिक होती है। इस प्रदेश की वार्षिक वर्षा का औसत 200 सेण्टीमीटर के आस-पास रहता है, परन्तु कहीं-कहीं 250 सेण्टमीटर से 500 सेमी तक वर्षा होती है। प्रदेश में प्रत्येक वर्ष लगभग 75 से 150 तड़ित झंझावात आते हैं।
प्राकृतिक वनस्पति- उष्ण और आर्द्र जलवायु के कारण इन प्रदेशों में सघन वनस्पति पायी जाती है। यहाँ भूमध्यरेखीय सदाबहार चौड़ी पती वाले वन पाए जाते हैं जिन्हें सेल्वास (Selvas) कहते हैं। इन वृक्षों की चोटियाँ छतरीनुमा होती हैं जिनसे सूर्य प्रकाश छनकर भूमि तक नहीं पहुंच पाता है। वायु एवं प्रकाश के लिए वृक्षों में एक प्रकार की प्रतिद्वन्द्विता सी रहती है। यहाँ के वनों में अनेक प्रकार के वृक्ष मिलते हैं। वनों में सदा हरियाली रहती है और ऐसा प्रतीत होता है कि वृक्षों का विश्राम काल है ही नहीं। वर्षभर वनस्पति की समस्त क्रियाएँ अर्थात् पत्तियाँ आना एवं गिरना, फूल खिलना, फलों का पकना और इन सबका नष्ट होना एक साथ चलता रहता है। यहाँ के वनों में महोगनी, बालसम, गटापार्चा, रबड़, एबोनी, सिनकोना, ताड़, बांस, बेंत के वृक्ष पाए जाते हैं। वृक्ष 60 से 70 मीटर ऊंचे होते हैं। बीच सघन लताएँ भी मिलती हैं। इन वनों की लकड़ियाँ बड़ी कठोर होती हैं। इनकी लकड़ियाँ इमारती काम के लिए सर्वोत्तम मानी जाती हैं। ये उद्योगों में भी काम में आती हैं। भूमि के निकट ताड़, बाँस, नारियल, केला, अनन्नास, आदि के छोटे वृक्ष भी कुंजों में पाये जाते हैं।
निवासी- यहाँ के मूल निवासी असभ्य तथा जंगली हैं। इनका रंग काला, होठ मोटे तथा नथुने चौड़े होते हैं। कांगो बेसिन के निवासी पिग्मी, मलेशिया के सकाई और अमेजन के बोरो इसी प्रकार के निवासी हैं। इनका अधिकांश समय शिकार करने, मछली पकड़ने तथा फल एकत्रित करने में व्यतीत होता है।
आर्थिक विकास- विषुवत रेखीय प्रदेश आर्थिक विकास की दृष्टि से विश्व के सबसे पिछड़े भाग हैं। इसके निम्न कारण हैं-
a. यहां की जलवायु स्वास्थ्य के लिए हानिप्रद है। निरन्तर ऊँचा तापमान, नम पवनें व सदैव वर्षा, आदि तत्व मानवजीवन के विकास में सहायक नहीं हैं, अत: इन प्रदेशों को शक्तिहीनों का या काहिल प्रदेश कहा जाता है।
b.इसके अतिरिक्त यहाँ के जीवजन्तु मानव के लिए हानिकारक हैं। विषुवत रेखीय प्रदेशों की बीमारियाँ (मलेरिया, पीला बुखार, सोने की बीमारी (Sleeping sickness) विश्वविख्यात हैं।
c.यहां के वन सघन होने से उनमें प्रवेश करना एक कठिन समस्या है, फिर यहाँ पर छोटे से क्षेत्र में अनेक प्रकार के विशेष कठोर लकड़ी के वृक्ष मिलते हैं, अतः इनका विदोहन बहुत ही कठिन है।
d.स्थान-स्थान पर नदी, नालों, दलदल एवं कृषि भूमि की कमी के कारण यह क्षेत्र मानव बसाव के अनुकूल नहीं है। आवागमन के साधनों का सुगम विकास भी यहाँ नहीं किया जा सकता है।
e.जनसंख्या बहुत कम तथा आदिम निवासियों की है। अतः यहाँ के 10 प्रतिशत भू-भाग पर विश्व की जनसंख्या का केवल 5 प्रतिशत ही इन प्रदेशों में निवास करता है। यह भी नदियों के तट एवं द्वीपों पर ही केन्द्रित है।
f.जावा एवं दक्षिणी नाइजीरिया ही सघन आबाद हैं, अतः वहाँ कुछ विकास भी हुआ है।
आगे है अभी सवाना तुल्य जलवायु प्रदेश...... लेख अभी जारी है.....।