व्यापारिक बैंकिंग की आधुनिक प्रवृत्तियां

आज हमारे व्यापारिक बैंकिंग पद्धति की में राष्ट्रीयकृत बैंक निजी अनुसूचित बैंड म्यूजिक गैर अनुसूचित बैंक एवं विदेशी बैंक खाते हैं वास्तव में भारतीय बैंकिंग में एक नया साल 1949 में भारतीय रिजर्व बैंक के राष्ट्रीयकरण के साथ प्रारंभ हुआ है उत्तर राष्ट्रीयकरण के तीन दशकों में भारतीय बैंकिंग में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है बैंकों के परंपरागत कार्यों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ है अब बैंक नए-नए विभिन्न प्रकार की सेवा प्रदान कर जन समुदाय को लाभान्वित कर रहे हैं आज बैंकों की शाखाएं उन देशों में खोली जा रही है जहां पहले बैंक की शाखाएं खोल ना पसंद नहीं करते थे।

आज बैंकों की शाखाएं उन क्षेत्रों में भी खोली जा रही है जहां पहले बैंक अपनी शाखाएं खोल ना पसंद नहीं करते थे। आज प्रारंभिक क्षेत्र को पर्याप्त मात्रा में धन उपलब्ध कराया जा रहा है आज बैंक विकास प्रेरित बैंक की ओर बढ़ रहे हैं। पहले भी अधिकतर अल्पकालीन ऋण दिया करते थे पर आज मध्यकालीन एवं दीर्घकालीन ऋण विकास के उद्देश्य प्रदान कर रहे हैं।

1991 में उदारीकरण में बैंकों को भी भागीदार बनाया गया है। 1991 में बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के उद्देश्य नरसिम्हा समिति गठित की गई। इस समिति के सुझाव को सरकार ने स्वीकार कर लिया और इसे बैंकिंग क्षेत्र में सुधार के लिए आवश्यक कदम बताया समिति के सुझाव अनुसार वैधानिक तरलता अनुपात को 40% से 25% लाना है सरकार ने इस अनुपात को धीरे-धीरे घटाकर मार्च 1997 में 27 % तक कर दिया। नगद कोष अनुपात को भी समिति के सुझाव अनुसार 15% से घटा का मार्च 1997 तक 10% कर दिया जिसके फलस्वरुप अनुसूचित बैंकों के पास 18000 करो रुपए का अतिरिक्त कोर्स उपलब्ध हुआ ब्याज दर को काफी लचीला बनाया गया और उसे निश्चित सीमाओं के भीतर स्वतंत्र छोड़ दिया गया ऐसा बैंकों के बीच प्रतियोगिता उत्पन्न करने के दृष्टिकोण से किया गया दूसरे बैंक अपने ग्राहक की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उचित ब्याज दर ले सकता है बैंकों की विधि को आपस में तुलनात्मक बनाने के दृष्टिकोण से संपत्ति का अर्थ के लिए प्रावधान इत्यादि के लिए समान पद्धति अपनाई जाएगी 180 दिन से अधिक ब्याज को नहीं माना जाएगा सभी बैंकों के लिए 8% कर दिया गया है/। जिसके लिए सरकार ने ₹5700 करोड़ प्रदान करने की योजना बनाई है बैंकों को पूंजी बाजार से पैसा उगाने के दृष्टिकोण से  बैंकिंग  नियमन अधिनियम में परिवर्तन किया गया है । स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में ₹1400करोड़ के माध्यम से उगाहा है। स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का उधार देने का आधारभूत घटाकर 14% कर दिया गया है। बैंकों को अपनी शाखाएं खोलने की पूर्ण  स्वतंत्रता दी गई है ऋणों की वसूली के मामले को शीघ्र निपटाने  के उद्देश्य स्पेशल recovery tribunals  गठित किए गए हैं। भारतीय बैंकिंग में निजी बैंकों के महत्व को स्वीकार करने के उद्देश्य से निजी बैंकों को खोलने की अनुमति सरकार के पास हो रही है।

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