विश्व बैंक और भारत

भारत विश्व बैंक के स्थापना सदस्यों में से एक है। भारत की स्थापना सदस्यों में से हैं जिन्होंने ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में भाग लिया था। प्रारम्भ में भारत खोटे के आधार पर पांचवें नंबर पर होने के कारण एक स्थाई कार्य संचालक नियुक्त करता है। परंतु अब 5वें नंबर से नीचे आ जाने के कारण भारत के पास अभियान अधिकार नहीं है। भारत और छठे नंबर पर है और उसका अभियान से 1992 में 5 अरब 400000000 अमेरिकन डॉलर था भारत को पांचवें नंबर से नीचे आ जाने पर भी बैंक ने लगातार महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की है पंचवर्षीय योजनाओं को सफल बनाने के लिए बैंक ने भारत को समय-समय पर अधिक मात्रा में ऋण देखकर भारत के विकास गति को तेज करने में मदद की है। बैंक ने भारत को अधिकाधिक सहायता देने के उद्देश्य भारत संस्थाओं या देशों की सहायता से 1958 में भारत सहायता क्लब की स्थापना भी की जिसे अब भारत विकास मंच के नाम से जाना जाता है यह संस्थाएं या देश है। विश्व बैंक, अंतरराष्ट्रीय विकास संघ, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, जर्मनी, इटली, बेल्जियम तथा इसके द्वारा समय-समय पर भारत की विधि एवं तकनीकी सहायता करता रहा है। भारत सहायता क्लब की स्थापना के अलावा विश्व बैंक ने दिल्ली में एक प्रतिनिधि नियुक्त कर रहा है जो देश की विकास योजनाओं के संबंध में संबंधित अधिकारियों एवं मंत्रियों से संपर्क बनाए रहता है। इसके अतिरिक्त विश्व बैंक समय समय पर कवियों को भेजता रहता है। जिसका उद्देश्य भारत की विकास परियोजनाओं का मौके पर अध्ययन कर उनका मूल्यांकन करना तथा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का स्वतंत्र सर्वेक्षण करना होता है।

विश्व बैंक द्वारा भारत को समय-समय पर वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्राप्त होती रहती है भारत में रेलवे लाइन बिछाने के लिए 86 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया। 1949 में कृषि सुधार के लिए $70 करोड़ प्राप्त हुआ। 1950 के निर्माण के लिए प्राप्त हुआ और उद्योग के विकास के लिए प्राप्त हुआ। 1955 में औद्योगिक साख एवं विनियोग निगम के लिए प्राप्त हुआ। 1957 में इंडियन एयरलाइंस के लिए 17 करोड़ का ऋण प्राप्त हुआ। कार्य की प्रगति के अनुसार ही को हस्तांतरित होते रहे हैं। कार्य में उचित प्रगति ना होने पर बैंक ऋणों की किस्तों में देरी भी करता रहा है। 1987 में  भारत में आए भयंकर सूखे से निपटने के लिए विश्व बैंक और उसके सहयोगी संस्थाओं से लगभग 350000000 डॉलर का ऋण मिला। इस प्रकार 1987 तक भारत को विश्व बैंक से कुल लगभग 1100 करोड़ डालर का ऋण प्राप्त हुआ।

विश्व बैंक ने भारत को समय-समय पर विभिन्न प्रकार की तकनीकी सहायता भी प्रदान की है। समय-समय पर हमारे विकास परियोजनाओं के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की भी सुविधा प्रदान की है। इनके मार्गदर्शन एवं सुझावों से हमारे कार्यक्रम बेहतर हो सके हैं।

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