उष्ण घास के मैदान अथवा सूडान अथवा सवाना तुल्य जलवायु प्रदेश:-
स्थिति और विस्तार- यह प्रदेश भूमध्यरेखीय प्रदेश के दोनों ओर 5° से 20° अक्षांशों के मध्य फैले हैं। इस जलवायु प्रदेश के एक ओर (पूर्व में) मानसूनी प्रदेश और पश्चिम के उष्ण मरुस्थलीय प्रदेश हैं। यह क्षेत्र प्रायः महाद्वीपों के मध्य भाग में पाए जाते हैं। सवाना प्रदेश का विस्तार अफ्रीका महाद्वीप के सूडान राज्य में विशेष रूप से पाया जाता है। इस कारण इन्हें सूडान तुल्य प्रदेश भी कहते हैं।
1. दक्षिण अमरीका में ये प्रदेश मुख्यतः के मैदानी प्रदेश जिन्हें कम्पोज कहा जाता है, बोलिविया, पराग्वे, ग्रानचाको नदी की घाटी तथा वेनेजुएला के मैदान, उत्तरी कोलंबिया में लानोस सवाना के नाम से जाना जाता है।
2. मध्य अमरीका में ये प्रदेश दक्षिणी एवं पश्चिमी तटों के किनारों के भागों में फैले हुए हैं। यूकाटन प्रायद्वीप का अधिकांश भाग क्यूबा और पश्चिमी द्वीप समूह के पश्चिमी द्वीप एवं पश्चिमी मेक्सिको इस प्रकार की जलवायु प्रदेश के अन्तर्गत आते हैं।
3. अफ्रीका में ये प्रदेश अर्द्धचन्द्राकार रूप में विषुवत रेखीय भाग के उत्तर में सेनेगल, माली, मध्य अफ्रीका गणतन्त्र नाइजर, सूडान के अधिकांश भाग, घाना, दहोमी, टोगो, आइवरी कोस्ट, नाइजीरिया के कुछ भागों में फैले हैं। विषुवत् रेखा के दक्षिण में अंगोला के उत्तरी एवं पूर्वी भाग, जायरे के दक्षिणी किनारे, न्यासालैण्ड, जाम्बिया, तंजानिया, कीनिया, इथियोपिया और मैडागास्कर द्वीप का पश्चिमी भाग भी इस प्रदेश में सम्मिलित हैं।
जलवायु- इन प्रदेशों में सूर्य दो बार चमकता है। एक बार जब वह अयन रेखाओं की ओर जाता है और दूसरी बार जब वह विषुवत् रेखा की ओर लौटता है। अत: यहाँ दो स्पष्ट ऋतुएँ होती हैं। इस प्रदेश में गर्मी अधिक पड़ती है। विषुवत् रेखा के उत्तर वाले क्षेत्र में अप्रैल से अक्टूबर तथा दक्षिण वाले क्षेत्रों में अक्टूबर से अप्रैल तक अधिक गर्मी पड़ती है।
तापमान- ग्रीष्म में औसत तापमान 20° सेण्टीग्रेड से 32° सेण्टीग्रेड तक पाया जाता है। शीतकाल का औसत तापमान 21° सेण्टीग्रेड के लगभग रहता है, यहाँ किसी भी महीने का तापमान 20° सेण्टीग्रेड से कम नहीं रहता है। वार्षिक औसत तापमान 25° सेण्टीग्रेड और वार्षिक ताप परिसर 5° सेण्टीग्रेड से 10° सेण्टीग्रेड के बीच रहता है।
वर्षा- इस प्रदेश में वर्षा केवल ग्रीष्म में होती है, किन्तु वर्षा का वितरण असमान है। भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के निकट के भागों में वर्षा का औसत 200 सेमी होता है, किन्तु मरुस्थलीय भागों के निकट के क्षेत्रों में यह मात्र 25 सेमी से 40 सेमी ही रहता है। वार्षिक वर्षा का औसत 50 सेण्टीमीटर से 100 सेण्टीमीटर तक रहता है। शीतकाल में इस प्रदेश में शुष्क सन्मार्गी पवनों के क्षेत्र में रहने के कारण यहाँ ऋतु शुष्क रहती है। वर्षा निश्चित न होने के कारण कभी-कभी अकाल पड़ जाता है।
प्राकृतिक वनस्पति- इस प्रदेश की जलवायु की विशेषता के कारण यहाँ की मुख्य वनस्पति घास है। ग्रीष्म में भीषण गर्मी के कारण वर्षा का अधिकांश जल भाप बनकर उड़ जाता है। इस कारण यहाँ एवं ताड़ के हैं। यहाँ पैदा होने वाली 1¼ से 3 मीटर तक लम्बी होती है। वर्षों के आरम्भ होते ही घास बड़ी तीव्रता से बढ़ने लगती है, परन्तु ग्रीष्म में यह घास भीषण ताप से झुलस जाती है और सारा क्षेत्र भूरा-भूरा हो जाता है। जिन भागों में वर्षा अधिक होती है वहाँ वृक्षों की संख्या बढ़ जाती है, अतः भूमध्य रेखा की ओर वृक्षों की संख्या अधिक होती जाती है।
घास के मैदानों को भिन्न-भिन्न स्थानों पर कई स्थानीय नामों से पुकारा जाता है, जैसे-अफ्रीका में उत्तर की ओर सवाना, दक्षिण में पार्कलैण्ड, पूर्वी पठार पर सूडान, वेनेजुएला में लानोज और ब्राजील में मैटोग्रासो, गोयज और कम्पोज।
निवासी- यहाँ के मूल निवासी हब्शी (पिग्मी) हैं जो कद में छोटे होते हैं। इनका शरीर हृष्ट-पुष्ट होता है। ये स्याही जैसे काले रंग के होते हैं। इनके होंठ मोटे और नाके चपटी होती है। बाल घुंघराले और ऊँन जैसे मोटे होते हैं। ये बड़े ही आलसी किन्तु सहनशील होते हैं। उत्तरी अफ्रीका में अनेक गोरे लोगों के साथ विवाह होने से हब्शियों की जो मिश्रित जाति पैदा हुई है, उसे ‘बण्टू' कहते हैं। इसी भाँति दक्षिण अमरीका के मूल रेड इण्डियन एवं दक्षिणी यूरोपवासियों के मिश्रण से जो जाति पैदा हुई है उसे ‘मेस्टिजो’ कहते हैं।
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