प्राचीन भारतीय इतिहास-43 सातवाहन

सातवाहन

      सातवाहन वंश की स्थापना सिमुक (सिन्धुक) ने कण्व वंशीय शासक सुशर्मा (सुशर्मन) की हत्या कर की थी।

      सातवाहनों की राजधानी प्रतिष्ठान थी। शातकर्णि प्रथम सातवाहन वंश का प्रथम योेग्य शासक था। इसने दो अश्वमेघ यज्ञ तथा एक राजसूय यज्ञ का अनुष्ठान किया।

      सातवाहन शासक हाल ने प्राकृत भाषा में गाथा सप्तशती की रचना की तथा उसके दरबारी  गुणाढ्य ने पैशाची प्रकृत मंे वृहत्कथा नामक पुस्तक की रचना की थी।

      सातवाहन शासकों के नाम से (यथा गौतमी पुत्र सातकर्णि) विदित होता है कि उनका समाज मातृ सत्तात्मक रहा होगा। सर्ववर्मन ने कातंत्र नामक व्याकरण ग्रंथ की रचना की।

      सातवाहन वंश का 23वाँं शासक गौतमी पुत्र सातकर्णि इस वंश का सबसे महान शासक था।

      गौतमी पुत्र सातकर्णि ने अपने को एक ब्राह्मण कहा। शकांे का हराया तथा क्षत्रिय शासको के दर्प को चूर किया।

      सातवाहन शासकांे ने ही सर्वप्रथम भूमि दान देने की प्रथा प्रारम्भ की। भूमिदान का प्रथम अभिलेखीय साक्ष्य नागरिका के नानाघाट अभिलेख से प्राप्त होता है। 

      शकांे पर विजय के उपलक्ष्य में गौतमी पुत्र सातकर्णि ने नासिक केे बौद्ध संघ को ष्अजकालकियष् तथा कार्ले के भिक्षुक संघ को करजक नामक ग्राम में दान दिये।

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