प्राचीन भारतीय इतिहास-44 विदेशी आक्रमण

विदेशी आक्रमण

      उत्तर पश्चिम से पश्चिमी विदेशियों के आक्रमण मौर्योत्तर काल की सबसे महत्पूर्ण राजनीतिक घटना थी।

      उत्तर पश्चिम से आक्रमण करने वाले ये आक्रान्ता क्रमशः-भारतीय यूनानी 2.़ शक 3. पहलव 4 कुषाण थे।

      भारत पर सबसे पहले आक्रमण वैक्ट्रिया के यवन शासक डेमेट्रियस ने किया।

      इसने पंजाब एवं सिन्ध के बहुत बड़े भाग को जीत कर शाकल (आधुनिक स्यालकोट) को अपनी राजधानी बनाया।

      डेमेट्रियस कुल का महान शासक मिनान्डर या मिलन्द था।

      स्यालकोट शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था मिनान्डर ने बौद्ध भिक्षु नागसेन से बौद्व धर्म की दीक्षा ली। प्रसिद्ध बौद्व ग्रन्थ मिलिन्दपन्हों मे बौद्ध भिक्षु नागसेन एवं मीनाण्डर की बृहद् वार्ता संकलित है।

      भारत में सबसे पहले सेाने के सिक्के हिन्द यूनानियों ने शुरू कियें।

      सबसे पहले लेखयुक्त सिक्के का प्रचलन हिन्द यूनानियों द्वारा किया गया।

      गार्गी संहिता में यह स्पष्ट कहा गया है कि ज्योतिष के क्षेत्र मेें भारत यूनान का ऋणी है।

      गान्धार एवं मथुरा की बुद्ध व बोधिसत्वो की मूर्तियों पर यूनानी और रोमन कला का प्रभाव स्पष्ट दिखायी पड़ता है। इस कला को हैलेनिस्टिक कला भी कहा जाता है।
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