प्राचीन भारतीय इतिहास-45 शक

 

शक

      यूनानियों के पश्चात् भारत पर आक्रमण करने वाली दूसरी विदेशी जाति शकों की थी।

      शक मुख्यतः सीर दरया के निवासी थे भारत पर आक्रमण करने वाले शक पूर्वी ईरान से होकर आये थे। हेलमण्ड घाटी को शक स्थान कहा जाता है।

      शक पाँच शाखाओं मे विभक्त थे।

      शकों का सबसे प्रतापी शासक उनके पश्चिमी क्षत्रप के कार्दमक वंश (उज्जैन) का रूद्रदामन प्रथम था।

      रूद्रदामन प्रथम ने मौर्य शासक चन्द्रगुप्त द्वारा काठियावाड़ में बनवाये गये सुदर्शन झील का जीर्णोद्वार करवाया।

      रूद्रदामन संस्कृत का बड़ा प्रेमी था उसने ही सबसे पहले विशुद्ध संस्कृत भाषा में लम्बा अभिलेख (जूनागढ़ अभिलेख) जारी किया।

      इस वंश का अन्तिम शासक रूद्र सिंह तृतीय था। गुप्त शासक चन्द्र गुप्त द्वितीय ने उसे पराजित कर पश्चिमी क्षत्रपों के राज्य को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

      जूनागढ़ अभिलेख चम्पू शैली में लिखा गया है। रूद्रदामन वैदिक धर्मानुयायी था उसने संस्कृत भाषा को राजाश्रय प्रदान किया।

पार्थियन या पहलव

      पश्चिमोत्तर भारत में शकों के अधिपत्य के बाद पार्थियाई लोगों का अधिपत्य हुआ।

      पार्थियाई शासक गोन्दोफार्निस के शासन काल मंे सेन्ट टामस ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिये भारत आया था।

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