प्राचीन भारतीय इतिहास-46 कुषाण वंश

कुषाण वंश

      कुषाण चीन के यूची जाति के थे। भारत में कुषाण वंश का संस्थापक कुजुल कडफिसेेस था। वह शैव धर्मानुयायी था। इसने महेश्वर की उपाधि धारण किया। 

      कुषाण वंश का वास्तविक संस्थापक राजा कनिष्क था। इसकी राजधानी पुरूषपुर या पेशावर थी। कनिष्क ने पाटलिपुत्र पर आक्रमण अश्वघोष लेखक, बुद्ध का भिक्षापात्र और एक अद्भुत मुर्गा प्राप्त किया।

      कनिष्क ने 780 में एक संवत चलाया जिसमें शक संवत कहा जाता है।

      कनिष्क ने चैथी बौद्व संगीति का आयोजन कुण्डल वन (कश्मीर) में करवाया। इस संगीति में बौद्व धर्म महायान एवं हीनयान दो सम्प्रदायों में विभक्त हो गया।

      कनिष्क बौद्व धर्म के महायान सम्प्रदाय का अनुयायी था। महायान शाखा का अभ्युद्य और प्रचार कनिष्क के समय में हुआ।

      मथुरा में कनिष्क की एक प्रतिमा मिली है जिसमें उन्हें घुटने तक चोगा एवं पैरो मंे भरी जूते पहने हुये दिखाया गया है।

      कनिष्क का राजकवि अश्वघोष था। विद्वानों ने अश्वघोष की तुलना मिल्टन, काण्ट, गेटे तथा वाल्टेयर से की है। इसका राज बैद्य चरक था। जिसने चरक संहिता की रचना की थी। यह औषधिशास्त्र के ऊपर प्राचीनतम रचना है।

      भारत का आइन्सटीननागार्जुन को कहा जाता है इसकी रचना का नाम माध्यमिक सूत्र है।

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