महिला सशक्तिकरण

सशक्तिकरण एक व्यापक शब्द है जिसमे अधिकारों और शक्तियों का स्वाभाविक रूप से समावेश है। यह एक ऐसी मानसिक अवस्था है जो कुछ विशेष आंतरिक कुशलताओं और शैक्षिक सामाजिक आर्थिक राजनीतिक आदि परिस्थितियों पर निर्भर करती है। जिसके लिए समाज में आवश्यक कानूनी सुरक्षात्मक प्रावधानों और उनके भली-भांति क्रियान्वन हेतु सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था का होना आवश्यक है। 

महिला सशक्तिकरण मुख्य रूप से नीति निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस प्रकार महिला सशक्तिकरण से तात्पर्य एक ऐसी सामाजिक प्रक्रिया से है। जिसमें महिलाओं के लिए सर्व संपन्न और विकसित होने हेतु संभावनाओं के द्वार खुले नए विकल्प तैयार हो। घर शिक्षा स्वास्थ्य सुविधाएं प्राकृतिक संसाधनों बैंकिंग सुविधाएं कानूनी हक और प्रतिभाओं के विकास हेतु पर्याप्त रचनात्मक अवसर प्राप्त हो।

साहित्य में स्त्री को प्राया एक योग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है साहित्य में नारी के काम शुरू की व्यापक अभिव्यक्ति हुई है नारी के द्वारा रचनात्मक कार्यों को साहित्य में समुचित स्थान नहीं दिया गया है समाजवाद संस्कृति के द्वारा नारी का विशिष्ट निर्माण है जिसके माध्यम से उसकी परिस्थिति भूमिका पहचान सोच मूल्य अपेक्षाओं को बढ़ा जाता है। नारियल के निर्माण की प्रक्रिया समाज की संस्थाओं सांस्कृतिक मूल्य व्यवहारों तथा लिखित व मौखिक ज्ञान परंपराओं धार्मिक अनुष्ठानों अपेक्षित विशिष्ट मूल्यों से स्थापित होती है जन्म से ही बालक के समाजीकरण की प्रक्रिया इस तरह से संचालित होती है कि बालक को आक्रामक कार्य के प्रति डालने का स्वरूप बनाया जाता है ।बालिका को सहनशीलता के गुणों को आत्मसात करने की शिक्षा दीक्षा प्रदान की जाती है या प्रक्रिया बालक व बालिका के परिवेश से इस तरह जोड़ दी जाती है कि अंततः पहचान वाले लोगों की परिभाषा के आधार पर उसके अनुरूप व्यवहार करना समान माना जाता है वह प्रदत अपेक्षाओं से भिन्न से भिन्न व्यवहार असामान्य करार कर दिया जाता है बालक-बालिका के खेल खिलौने इस तरह से भिन्न होते हैं कि समाज द्वारा परिभाषित नर-नारी के क्षेत्र के अनुरूप ही उनका विकास हो सके के प्रति अभिरुचि बाल्यकाल से ही लड़की के मन में अंकित की जाती है इस प्रक्रिया में बालिका के अंदर को बुद्धि की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। समाज में अनेक संस्थाएं नारी की स्थिति को निम्न बनाने में सहायक होती हैं। परिवार व विवाह जैसी संस्थाएं जो कि व्यक्ति को भावनात्मक सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। किसी स्तर पर नारी की स्थिति व शोषण की प्रक्रिया के लिए उत्तरदाई हैं विवाह से जुड़े अनेक आयाम उदाहरण दहेज प्रथा, वैधव्य, कौमार्य, अदृश्य हिंसा के आयाम नारी की स्थिति के नकारात्मक पक्ष को प्रस्तुत करते हैं।

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