राष्ट्रीय पोषण मिशन

 भारत सरकार द्वारा चलाई गई राष्ट्रीय पोषण मिशन एक कार्यक्रम है जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाएगा तथा इसके 1000000 लोगों को लाभ पहुंचेगा इस कार्यक्रम को देश के सभी राज्यों के जिलों में चरणबद्ध तरीके से शामिल किया जाएगा इस मिशन को भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा नीति आयोग द्वारा संयुक्त रुप से चलाया जाएगा भारत सरकार द्वारा 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों और महिलाओं के बीच कुपोषण को कम करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं लागू की हैं किंतु इन योजनाओं के बावजूद देश में कुपोषण से संबंधित समस्याएं अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में बहुत अधिक हैं इस मिशन को स्थापित करने के लिए वांछित तालमेल बढ़ाएगा जिससे इस पोषण की समस्या से कुछ हद तक बचा जा सके

राष्ट्रीय पोषण योजना के लक्ष्य

यह मिशन एक शीर्षस्थ निकाय के रूप में मंत्रालयों के पोषण संबंधी हस्तक्षेपों की निगरानी पर्यवेक्षण तथा उनके लक्ष्य निर्धारण का कार्य करेगा।

एमिनेम का मुख्य लक्ष्य रक्ताल्पता कुपोषण तथा को कम करते हुए अल्प वजन वाले बच्चों में क्रमशा 2% से 3% की कमी लाना।

कुपोषण जैसी भीषण समस्या के समाधान हेतु विभिन्न योजनाओं का प्रारूप बनाना। 

मजबूत अभिसरण तंत्र प्रारंभ करना।

मिशन को प्राप्त करने के लिए राज्यों को केंद्र शासित प्रदेशों को प्रोत्साहित करना।

अधिक आधारित उपकरणों के प्रयोग के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को प्रोत्साहित करना

आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों का कद मापन की प्रक्रिया को लगातार रखना

सामाजिक सर्वेक्षण की प्रक्रिया के माध्यम से जांच करना 

राष्ट्रीय पोषण मिशन की आवश्यकता

राष्ट्रीय पोषण मिशन का गठन बच्चों और माताओं में कुपोषण की समस्या को दूर करने के उद्देश्य से किया गया लगभग 10 वर्ष पूर्व हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि देश के लगभग आधे बच्चे कुपोषित हैं इस समस्या के समाधान के लिए सरकार के पास केवल एक ही विकल्प था बाल विकास योजना विश्व के सबसे बड़े सामाजिक कार्यक्रम में भी वर्षों से अब तक बाल कुपोषण यूपीए सरकार ने आईसीडीएस को सफल बनाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की संख्या बढ़ाई इससे भी कोई बड़ा बदलाव नहीं आया वर्तमान सरकार ने कुपोषण से निपटने के लिए सभी राज्यों को निर्देश दिए हैं कि चाहे जिस तरह की योजना बनाई उसे बनाकर इस समस्या का निपटारा करें क्योंकि बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकलांगता के साथ-साथ उनकी उत्पादकता पर भी प्रभाव डालती है किसी भी देश में ओशो का अधिक उस देश की आर्थिक प्रभाव डालता है।

एक अनुमान के अनुसार कुपोषण द्वारा एशिया के सकल घरेलू उत्पाद पर 11% तक का प्रभाव पड़ेगा। संसार में माना गया है कि मां के गर्भ में आने वाले से लेकर 2 वर्ष तक शिशु की उचित देखभाल ना होने के कारण हो सकता है यही नहीं एक कुपोषित गर्भवती स्त्री का कुपोषित बच्चे को जन्म देती है।

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