अंग :- उत्तर बिहार के वर्तमान भागलपुर जिले में अंग महाजनपद स्थित था । महाभारत से पता चलता है कि अंग तथा मगध एक ही राज्य की स्थापना अंग नामक राजा के द्वारा की गई थी ।बौद्ध ग्रन्थ अंगुत्तर निकाय से पता चलता है कि महात्मा बुद्ध के उदय के पूर्व अंग उत्तरी भारत का एक प्रमुख महाजनपद था । इसकी राजधानी चम्पा थी । अंग तथा मगध के बीच सम्प्रभुता के लिए बराबर संघर्ष चला। अंग का प्रसिद्ध राजा ब्रह्मदत हुआ जिसने मगध के राजा भट्टिय को पराजित कर वहाँ अपना अधिकार कर लिया। विधुर पंडित जातक में मगध की राजधानी राजग्रह को अंग देश का एक नगर बताया गया है। किंतु मगध नरेश बिम्बिसार ने ब्रह्मदत की हत्या कर अंग पर अपना अधिकार कर लिया तथा अपने पुत्र अजातशत्रु को वहाँ का उपराजा बना दिया। इस प्रकार अंंग की स्वाधीनता का अंत हुआ ।
अजंता :- महाराष्ट्र प्रांत के ओरंगाबाद जिले में अजन्ता नाम की पहाड़ी है। हैदराबाद के समीप जलगांव नामक रेलवे स्टेशन से लगभग 37 मील की दूरी पर फरदापुर नामक ग्राम है। यहाँ से दो मील दक्षिण - पश्चिम की ओर अजन्ता नामक ग्राम बसा है । इसी के नाम पर पहाड़ी का नाम अंजता पड़ गया है। यहाँ पर्वत को काटकर 29 गुफाये बनाई गई हैं जिनकी छतोंं और दीवार पर उत्कृष्ट चित्रकारियाँ मिलती हैं। अजंता मेेें अब केेेवल छः गुफाओं (9,10,16,17,1-2) के चित्र ही अवशिष्ट हैैैं, अन्य नष्ट हो गए हैं । इनका समय ईसा-पूर्व प्रथम शती सेे लेकर सातवीं शती ईस्वी तक है। 9वी-10वी गुफाओं के चित्र सर्वप्रचीन है जिसका समय ईसा पूूर्व प्रथम शती हैै। इन गुफाओं के चित्रो में एक राजकीय जुलूस का चित्र प्रसिद्ध है। 16 वी -17 वी गुफाओंं के चित्र गुुुुप्तकाल के हैं और वे कला की दृष्टि से सर्वोत्तम है। ' मरणासन्न राजकुुुमारी ' (Dying Princess) तथा 'माता और शिशु' नामक चित्र अत्यंत सुंदर , आकर्षक एवं प्रभावोत्पादक है ।
देवगिरि :- महाराष्ट्र के ओरंगाबाद जिले में स्थित इस नगर की स्थापना यादव नरेश भिल्लम (1187-91 ) ने की तथा यहाँ अपनी राजधानी बसायी। उसके वंशजो ने 1309 ई तक शासन किया । यादव वंश के शासन में देवगिरि मेेें एक विशाल एवंं सुदृृृृढ़ दुर्ग का निर्माण हुआ था । यह 150 फीट ऊंचा है। इसमेेें आठ द्वार बने हैैैं । अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग पर आक्रमण कर वहाँ अपना अधिकार कर लिया । मुस्लिम युग के कई स्मारक यहा से मिलते हैैैं।