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प्राकृतिक वनस्पति- इन प्रदेशों में गरम और शुष्क जलवायु होने के कारण वनस्पति का अभाव पाया जाता है। यहाँ की वनस्पति में कॉंटेदार झाड़ियाँ मुख्य हैं। ये शुष्क जलवायु में भी जीवित रहती हैं। अपनी नमी को बनाए रखने के लिए इनकी जड़ें लम्बी, पते मोटे और चिकने होते हैं। इन सबके प्रभाव से ये पौधे वाष्पीकरण के प्रभाव से बच जाते हैं। इनके अतिरिक्त इनमें कॉटे होते हैं और भीतर से बुरी गन्ध निकलती है जिससे इन्हें पशु भी नहीं खाते हैं। यहाँ की वनस्पति में खजूर, ताड़, बबूल, खेजड़ी, नागफनी, झाऊ, रामबांस मुख्य हैं।
आर्थिक विकास- इन मरुस्थलों में विस्तृत रूप से निर्जन तथा बलुही मिट्टी का विस्तार है। यहाँ कठोर जलवायु दशाओं एवं वर्षा के अभाव के कारण जीवन-निर्वाह बहुत कठिन है। यहाँ के मौसम में परिवर्तन नहीं के बराबर होता है। इस प्रदेश को ‘सतत कठिनाइयों का प्रदेश' कहते हैं। इस प्रदेश के जिस भाग में स्थाई जल मिलता है या सदावाहिनी नदी बहती है वहीं सिंचित कृषि द्वारा सघन कृषि की जाती है। आस्ट्रेलिया में पातालतोड़ कुओं से बड़ेबड़े चरागाहों का विकास किया गया है, अत: यहाँ जल ही जीवन है।
खनिज पदार्थ- इन प्रदेशों में खनिजों का अभाव पाया जाता है फिर भी कई स्थानों पर सोना, चांदी, ताँबा, शोरा और सुहागा प्राप्त होता है। पश्चिमी आस्ट्रेलिया में सोना, चांदी, बॉक्साइट और ताँबा निकला जाता है। यहाँ की कालगूर्ली एवं कूलगार्डी की सोने की खाने विश्व प्रसिद्द हैं। चिली के मरुस्थलीय भाग से ताँबा और सोना निकाला जाता है। कालाहारी में हीरा और तांबा मिलते हैं। पश्चिमी एशिया एवं मध्य पूर्व के देशों अरब, इराक, ईरान,कुवैत, कतार, लीविया, अल्जीरिया और उत्तरी अमरीका के कोलोरेडो में खनिज तेल निकाला जाता है। इस खनिज तेल ने दक्षिण-पश्चिमी एशिया के देशों के का आर्थिक जीवन विकसित करने में सर्वाधिक योग दिया है। आज यह विश्व के सबसे धनी देशों में से है।
निवासी- अल्पविकसित सहारा, जलविहीन, खनिज व खनिज तेल विहीन मरुस्थलीय प्रदेशों के निवासी प्रायः पशुपालक और घुमक्कड़ होते हैं। सहारा तथा दक्षिण-पश्चिम एशिया के देशों में बददु निवास करते हैं। इन प्रदेशों की विशेष परिस्थितियों के कारण इनका जीवन घुमक्कड़ बन गया है। भेड़, बकरियाँ, ऊँट तथा घोड़े, आदि पालते हैं। भोजन तथा उद्यम के लिए ये अपने परिवार के सदस्यों के साथ भटकते रहते हैं। ये लोग मरुद्यानों के लोगों को घोड़े और खजूर बेचकर उसके बदले में गेहूँ, , शक्कर, वस्त्र तथा तम्बाकू, आदि वस्तुएँ लेते हैं।
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