मिनीसोटा विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पहली बार पूरी तरह से मानव आँख की तरह कार्य करने योग्य 3D रिसेप्टर्स का निर्माण कर दिखाया है। यह महत्वपूर्ण खोज कृत्रिम बियोनिक आँख बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है और यह तकनीक भविष्य में अंधे लोगों को देखने के लिए कृत्रिम आँख की सौगात दे सकता है। इस शोध को 1 सितंबर के अंक, एडवांस मटेरियल साइंस जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
शोधकर्ताओं द्वारा एक अर्ध गोलाकार ग्लास सतह में कई घुमावदार सतह का निर्माण कर उसपर चांदी के कणों को स्थापित किया गया है। फिर शोधकर्ताओं ने अर्धचालक पॉलीमर सामग्री की मदद से इसके प्रिंट को ग्रहण किया है। हालांकि प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलने की क्रिया में लगने वाला समय फ़िलहाल काफी लंबा है लगभग 1 घंटा के आसपास जबकि संकेत परिवर्तन की दक्षता लगभग 25% ही है। अब इस तकनीक को मानव अंगो के साथ स्थापित करने पर कार्य किया जा रहा है साथ ही संकेत परिवर्तन की दक्षता और लगने वाले समय को कम करने पर भी वैज्ञानिक कार्य कर रहे है।
प्रमुख शोधकर्ता मैक अल्पाइन ने कहा "मेरी माँ भी अंधी है उनका एक आँख बिलकुल भी काम नही करता है। मैं जब भी अपने कार्य के बारें में उनसे बात करता हूँ तब वो मुझसे कहती है तुम कब मुझे एक कृत्रिम बियोनिक आँख बनाकर देने वाले हो ।"
मैक अल्पाइन के अनुसार हमारी टीम का अब अगला कदम होगा जल्द ही और बेहतर प्रकाश संवेदी प्रोटोटाइप बियोनिक आँख का निर्माण किया जाय जो ज्यादा कुशलता से अपना कार्य को अंजाम दे। अब बिलकुल नरम सामग्री का उपयोग हम करने वाले है ताकि वो बिलकुल मानव आँखों की तरह की कार्य करें और उसमें कोई त्रुटि भी न हो, सच में एक असली मानव आँख की तरह।