डापलर प्रभाव
डापलर प्रभाव यह किसी तरंग की तरंगदैधर्य और आवृत्ती मे आया वह परिवर्तन है जिसे उस तरंग के श्रोत के पास आते या दूर जाते हुये निरीक्षक द्वारा महसूस किया जाता है। यह प्रभाव आप किसी आप अपने निकट पहुंचते वाहन की ध्वनी और दूर जाते वाहन की ध्वनी मे आ रहे परिवर्तनो से महसूस कर सकते है।
इसे वैज्ञानिक रूप से देंखे तो होता यह है कि आप से दूर जाते वाहन की ध्वनी तरंगो का तरंगदैधर्य बढ जाती है, और पास आते वाहन की ध्वनी तरंगो का तरंगदैधर्य कम हो जाती है। दूसरे शब्दो मे जब तरंगदैधर्य बढ जाती है तब आवृत्ती कम हो जाती है और जब तरंगदैधर्य कम हो जाती है आवृत्ती बढ जाती है।
यही प्रभाव कीसी भी तरंग (ध्वनी/प्रकाश/क्ष किरण/गामा किरण) पर होता है। तरंग श्रोत से दूर जाने पर उसकी आवृत्ती मे कमी आती है अर्थात तरंगदैधर्य मे बढोत्तरी होते है। तरंग श्रोत के पास आने पर उसकी आवृत्ती मे बढोत्तरी होती है अर्थात तरंगदैधर्य मे कमी आती है।
इस प्रभाव का प्रयोग बहुत सारे क्षेत्रो मे होता है, जिसमे प्रमुख है, राडार, वाहन का गति मापने वाले उपकरण, खगोलशास्त्र मे तारे की दूरी और गति मापन।