इसे मराठी में वेरुललेणी या वेरुल की गुफाएं कहते हैं जो अजंता की गुफाओं से मात्र 9 किलोमीटर दूर है।
माना जाता है कि इन गुफाओं में 300 ईसवी सन से 1000 ईस्वी तक चित्रांकन का काम हुआ है ।
यह भारत के तीनों प्राचीन धर्मो( हिंदू, जैन एवं बौद्ध) से जुड़ा हुआ है ।
यहां की गुफाओं में कैलाश, लंकेश्वर, इंद्रसभा और गणेश के चित्र दीवारों पर मिलते हैं ।
एलोरा की चित्रकलाएं अजंता के शास्त्रीय मानदंड से भिन्न है, यानी इनमें कला- कौशल के हृॉस के संकेत स्पष्ट दिखते हैं।
एलोरा की चित्रकलाओं की सर्वाधिक महत्वपूर्ण लाक्षणिक की विशेषताएं हैं- सिर को असाधारण रूप से तोड़ना, भुजाओं के कोणीय मोड,गुप्त अंगो का अवतल मोड़, तीखी प्रक्षिप्त नाक और बड़े-बड़े नेत्र ।
एलोरा की चित्रकला मध्यकालीन विशेषताओं का संकेत भी देती हैं।
एलोरा की गुफा मंदिर संक. 32 में उड़ती हुई आकृतियों व बादलों का दृश्य अत्यंत सुंदर है।