समास (COMPOUND)।

परिभाषा:-

दो अथवा दो से अधिक शब्दों के योग से जब एक नया शब्द बन जाता है तब उसे सामासिक शब्द और उन शब्दों के योग को समास कहते हैं।

जैसे-  कार्यकुशल शब्द कार्य और कुशल दो शब्दों के योग से बना है। इसका इसका अर्थ है- कार्य में कुशल,  इन दोनों शब्दों को जोड़ने वाला में शब्द है। समास होने पर उसका लोप हो गया।

विशेषताएं:-

1. समाज में कम से कम दो शब्दों का योग होता है।

2. ऐसे मेल वाले दो अथवा अधिक पद मिलकर एक हो जाते हैं।

3. मिलने वाले पदों के विभक्ति प्रत्यय का लोप हो जाता है।

4. संस्कृत तत्सम के होने पर संधि की स्थिति आने पर उसमें संधि भी हो सकती है।

5. समास प्रायः सजातीय शब्दों का ही होता है जैसे धर्मशाला तो ठीक है लेकिन यदि कहें मजहबशाला तो गलत होगा।

समास के भेद:-

समास के मुख्यतः चार भेद हैं तथा 15 उपभेद हैं।

1. अव्ययीभाव 

2. तत्पुरुष

3. द्वंद

4. बहुब्रीहि

      तत्पुरुष के अंतर्गत दो प्रसिद्ध समास और हैं कर्मधारय और द्विगु समास।

1. अव्ययीभाव समास

इस समास में पहला पद अव्यय और दूसरा पद संज्ञा होता है। समस्त पद मैं अव्यय के अर्थ की ही प्रधानता रहती है। 

जैसे=          प्रतिदिन--        दिन--दिन

     यथाशक्ति            -       शक्ति के अनुसार

 2. तत्पुरुष समास

जिस समाज का उत्तर अर्थात अंतिम पद प्रधान हो, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें बाद वाले पद की प्रधानता रहती है। कर्ता-कारक और संबोधन को छोड़कर शेष सभी कारकों की विभक्तियां लगा कर इसका समास-विग्रह होता है।

तत्पुरुष समास के भेद:-

तत्पुरुष समास के मुख्यत: आठ भेद रोते हैं।

1. द्वितीय तत्पुरुष (कर्म तत्पुरुष - को):-

सुखप्राप्त               सुख को प्राप्त करने वाला

माखनचोर              माखन को चुराने वाला

2. तृतीय तत्पुरुष (करण तत्पुरुष - से):-

नेत्रहीन          नेत्र से हीीन

रोगग्रस्त          रोग से ग्रस्त

3. चतुर्थी तत्पुरुष (संप्रदान तत्पुरुष - के लिए):-

ब्राह्मणदक्षिणा         ब्राह्मण के लिए दक्षिणा

गोशाला                  गो के लिए शाला

4. पंचमी तत्पुरुष (अपादान तत्पुरुष - से):-

धनहीन             धन से हीन

दोषमुक्त             दोष से मुक्त

5. षष्ठी तत्पुरुष (संबंध तत्पुरुष - का, की, के):-

गंगाजल           गंगा का जल

लोकनायक        लोक का नायक

6. सप्तमी तत्पुरुष (अधिकरण तत्पुरुष - में, पै, पर):-

पुरुषसिंह            पुरुषों में सिंह

आपबीती            अपने पर बीती

7. कर्मधारय:-

कर्म धारय का प्रथम पद विशेषण और दूसरा विशेष्य अथवा संज्ञा होता है। अर्थात विशेषण+ विशेष्य (संज्ञा)= कर्मधारय। जैसे-

महाकवि         महान है जो कवि

पीतसागर         पीत है जो सागर

नराधम            अधम है नर जो

जब इस समास में एक शब्द उपमान और दूसरा उपमेय होता है तब भी कर्मधारय समास होता है। इसके विग्रह में सदृश का प्रयोग करना पड़ता है। जैसे-

चरणकमल           कमल के सदृश चरण

मृगलोचन              मृग के सदृश लोचन

8. व्दिगु समास:-

जिस समास का प्रथम पद संख्यावाचक और अंतिम पद संज्ञा हो, उसे द्विगु समास कहते हैं। जैसे-

चौराहा             चार राहों का समाहार

चतुर्वेद              चार चार वेदों का समाहार 

              लेख अभी जारी है........

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