छिपी या अद्रस्य बेरोज़गारी -
इस तरह की बेरोज़गारी प्राथमिक क्षेत्र के कृषि में पाई जाती है इस तरह की बेरोज़गारी अधिकांशत ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलती है । जहाँ पर आवशयकता से ज़्यादा श्रमिक लगे होते हैं बाहर से देखने पर ऐसा लगता है कि सभी को काम उपलब्ध है लेकिन कृषि क्षेत्र के उत्पादन में योगदान शून्य है । इसी कारण ही इसे अद्रस्य बेरोज़गारी की श्रेणी में रखा जाता है तथा व्यक्ति की स्थित छिपी बेरोज़गारी की स्थिति कहलाती है ।
खुली बेरोज़गारी -
जहाँ पर सभी प्रकार के बेरोज़गारी को आपस में मिला दिया जाता है उसे खुली बेरोज़गारी कहा जाता है ।
ऐच्छिक बेरोजगारी - अर्थव्यवस्था में जब किसी व्यक्ति के लिए कार्य उपलब्ध हो लेकिन वह कार्य करने के इच्छुक न हो तो ऐसे व्यक्ति को ऐचिक बेरोज़गारी कहा जाता है ।
संरचनात्मक बेरोज़गारी - इस प्रकार की बेरोज़गारी पूंजी के अभाव के कारण उत्पन्न होती है जिसके कारण श्रमिकों को छँटनी कर दिया जाता तथा औद्योगिक कारख़ाने बंद हो जाते है ।
मौसमी बेरोज़गारी - जब अर्थव्यवस्था में कुछ दिनों के लिए काम उपलब्ध हो तथा कुछ दिनों के लिए काम उपलब्ध न हो तो ऐसी बेरोज़गारी को मौसमी बेरोज़गारी कहा जाता है ।