चक्रवात के श्रेणी क्रम-
उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को श्रेणीक्रम करने के लिए साफिर सिम्पसन हैरीकेन स्केल का प्रयोग किया जाता है यह एक 5 अंकों की निर्धारित प्रणाली है जिसका प्रयोग चक्रवात के भूमि पर टकराने के समय होने वाले नुकसान की संभावना का मूल्यांकन के लिए किया जाता है इस मूल्यांकन का प्रमुख रुप से पवने के वेग एवं सागर की लहर की ऊंचाई का मूल्यांकन किया जाता है ।
श्रेणी -1 -
यदि पवन की गति 119.14 किलोमीटर प्रति घंटा से 152.95 किलोमीटर प्रति घंटा हो तो उसे प्रथम श्रेणी चक्रवात कहां जाता है ।
- यदि सागरीय लहर की ऊंचाई 4 से 5 फीट हो तो इस स्थिति में प्रथम श्रेणी चक्रवात होता है ।
श्रेणी-2-
यदि पवन की गति 154.56 किलोमीटर प्रति घंटा से 177.10 किलोमीटर प्रति घंटा हो तो इसे द्वितीय श्रेणी का चक्रवात कहते हैं ।
- यदि सागरीय लहर की ऊंचाई 6 से 8 फुट हो तो इसे द्वितीय श्रेणी चक्रवात कहते हैं ।
श्रेणी- 3-
यदि पवन की गति 178.71 किलोमीटर प्रति घंटा से 209.3 0 किलोमीटर प्रति घंटा हो तो इसे तृतीय श्रेणी चक्रवात करते हैं ।
- यदि सागर यह लहर 9 से 12 फीट हो तो इसे तृतीय चक्रवात कहते हैं।
श्रेणी -4-
यदि पवन कि गत 210.91 किलोमीटर प्रति घंटा से 279.55 किलोमीटर प्रति घंटा हो तो इसे चौथी श्रेणी में रखा गया है ।
- यदि सागरीय लहर की ऊंचाई 13 से 18 फीट हो तो इसे चौथी श्रेणी में रखा गया है ।
श्रेणी -5-
यदि पवन 279.55 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक हो तो इसे पांच की श्रेणी में रखा गया है ।
- इसमें सागरीय लहर की ऊंचाई 18 फीट से अधिक होती है
= इस स्थिति को सुपर साइक्लोन भी कहते हैं ।