5 फरवरी, 1922 को संयुक्त प्रांत के गोरखपुर जिले में चौरी - चौरा नामक स्थान पर एक कांग्रेसी जुलूस पर पुलिस ने गोली चलाई। जिस कारण भीड़ क्रुद्ध और उत्तेजित हो उठी। क्रुद्ध भीड़ ने पुलिस थाने पर हमला करके उसमे आग लगा दी। जिसमे एक थानेदार समेत 21 सिपाहियों को जिंदा जला दिया गया। इसके पहले भी देश के विभिन्न भागों में भीड़ द्वारा हिंसा की अनेक घटनाएं हो चुकी थी। परन्तु इस हिंसक घटना से गांधीजी को बहुत दुख हुआ तथा उन्हें भय था कि जन उत्साह और जोश के इस वातावरण में आंदोलन आसानी से एक हिसक मोड़ ले सकता है।
आंदोलन की वापसी -- गांधीजी ने 12 फरवरी को बारदोली में कांग्रेस कार्य समिति की एक बैठक बुलाई, जिसमे चौरी - चौरा कांड के कारण सामूहिक सत्याग्रह व असहयोग आंदोलन स्थगित करने का प्रस्ताव पारित कराया। प्रस्ताव में रचनात्मक कार्यक्रमों पर जोर दिया गया, जिसमे कांग्रेस के लिए एक करोड़ सदस्य भर्ती कराना, चरखे का प्रचार, राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना, मादक द्रव्य निषेध, पंचायतें गठित करना आदि कार्यक्रम सम्मिलित थे।