(Yatra) यात्रा किसे कहते है ?

  • जब हम अपने निवास स्थान से किसी दूसरी जगह पर किसी विशेष कार्य हेतु जाते हैं तो उसे यात्रा करते हैं । प्राचीन काल में भी लोग यात्राएं किया करते थे।
  • यह लोग ऊंचे पर्वतों, पहाड़ियों, रेगिस्तान, नदियों और समुद्रों की जोखिम भरी यात्राएं किया करते थे। और परेशानियों से हार नहीं मानते थे और अपनी लड़ाई जारी रखते थे।
  • प्राचीन काल में लोग कुछ कारण वश यात्राएं करते थे। जैसे-काम की तलाश में प्राकृतिक आपदाओं के कारण व्यापार के लिए नये स्थानों की खोज के लिए दूसरे क्षेत्र को जीतने के लिए अपने विचार को फैलाने के लिए दूर के विचारों को जानने के लिए अध्ययन एवं अध्यापन के लिए तीर्थ यात्रा करने के लिए इत्यादि ।
  • प्राचीन समय में यात्रा भले ही जोखिम भरी थी परंतु उसके कुछ लाभ जरूर थे। यात्राओं से लोगों को एक दूसरे के विचारों को जानने का मौका मिलता है   यात्रा से लोग एक दूसरे की संस्कृति को समझते हैं यात्राओं से व्यापार फलता-फूलता है यात्राओं से नई जगह की खोज हुआ करती है।  यात्राओं के विभिन्न संस्कृतियों का पता है। आज भी लोग यात्रा करते हैं।
  • आज भी यात्रा करने का कारण लाभ वही है ।
  • परंतु साधन बदल गए हैं । भारत में विदेश यात्रा करने वाले कुछ पुराने जाने-माने प्रसिद्ध व्यक्ति प्राचीन समय में ही भारत की यात्रा पर  कुछ विदेशी यात्री भी भारत में आए । जैसे-मेगस्थनीज, फरहान, सॉन्ग अलबरूनी, वास्कोडिगामा, डोमिंगो पायस इत्यादि।
  • यात्रा के साधन पहले सड़क मार्ग, जलमार्ग या फिर पैदल सफर किया करते थे। उनको सफर करने में महीनों सालों लग जाते थे। परंतु आधुनिक समय में यात्रा के संसाधनों में बदलाव आया है ।
  • आज के लोग सड़क मार्ग ,रेल मार्ग जलमार्ग ,वायु मार्ग में किसी के द्वारा या फिर सभी के द्वारा सफर करते हैं। आज के यात्री दूर तक का सफर वायुमार्ग के द्वारा कुछ ही घंटों में तय कर लेते हैं यह सभी यात्रा के साधनों के अपने-अपने गुण और अवगुण हैं। 
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