उष्णकटिबंधीय चक्रवात की विशेषताएं एवं मौसमी प्रभाव-
1- उष्णकटिबंधीय चक्रवात के तापमन संबंधी भिन्नता कम होती है ।
2- यह चक्रवात महाद्वीप पूर्वी तटों पर विकसित होते हैं क्योंकि व्यापारी पवन एवं गर्म महासागरीय जलधारा यहां पर उपयुक्त ताप की दशा बनाए रखते है महाद्विपो के पश्चिमी तटों के पास सीत जल उद्धेलन की की घटना से सागर के सतह पर जल ठंडा हो जाता है जिसके कारण चक्रवात पश्चिमी तटों के पास निर्मित नहीं होते हैं ।
3- यह चक्रवात ग्रीष्म ऋतु में अधिक प्रभावित होते हैं
4- व्यापारी पवन के प्रभाव से यह चक्रवात महाद्वीपों के पूर्वी तटों को प्रभावित करते हैं ।
तापमान एवं दाब -
जब उष्णकटिबंधीय चक्रवात धरातल पर पहुंचते तो उसे धरातल का लेम्ड फाल कहते हैं चक्रवात के लेम्ड फाल होते ही तापमान में वृद्धि होती है एवं वायुदाब में कमी आ जाती है वायुदाब में कमी आने से पवने के वेग में वृद्धि हो जाती है चक्रवात के मध्य दाब प्रवणता बल जितना ही अधिक होगा पवन की गति उतनी ही अधिक होगी ।
विनाशकारी पवने -
चक्रवात के eye well के पास पवनों की गति सबसे अधिक होती यहां पर पवन की गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे भी अधिक होती हैं इसके कारण प्रदेश में बड़े पौधे एवं मकानों में काफी क्षति होती है ।
बाढ़ एवं भूस्खलन -
इस चक्रवात में कपासी वर्षा बादल से मुसलाधार वर्षा होती है जो तटीय प्रदेशों में बाढ़ एवं भूस्खलन की घटना को बढ़ावा देते हैं ।
सी अपशंज की घटना -
पोस्ट कटिबंधीय चक्रवातों में सागरों के ऊपर ऊंची ऊंची लहरें उत्पन्न होती हैं यह लहर पवन की तेज गति के प्रभाव से सीधे तटीय क्षेत्रों में प्रवेश कर जाती हैं तो उसे सी अपशंज की घटना कहते हैं यह भी तटीय प्रदेशों में बाढ़ लाने में अहम भूमिका निभाते हैं ।
बादल फटने की घटना -
यह उष्णकटिबंधीय चक्रवात की समाप्ति समान्यत : बादल फटने की घटना से होती है यदि काफी कम समय में 100 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा हो जाए तो उसे बादल फटने की घटना कहते हैं यह प्राय: कपासी वर्षक बादल से के साथ होती है ।