चोल
चोल वंश का संस्थापक विजयालय (850-70ई0) था।
इसकी राजधानी तंजौर थी विजयालय ने नर केसरी की उपाधि धारण की थी।
चोलोें का वास्तविक संस्थापक आदित्य प्रथम था।
आदित्य प्रथम ने कोदण्डराम की उपाधि धारण की थी।
राजराज प्रथम ने श्रीलंका पर विजय प्राप्त कर इसकी विजित प्रदेश को चोल सामा्रज्य का एक नया प्रान्त बनाया।
राजराज प्रथम ने विजित श्रीलंकाई प्रान्त का नाम माम्डिचोलमंडलम् रखा तथा अनुराधापुर के स्थान पर पोलन्नरूआ को इसकी नई राजधानी बनायी।
राजराज प्रथम हिन्द महासागर मे स्थित मालद्वीप को भी विजित किया था। इन विजयों से चोल नौशक्ति की श्रेष्ठता ज्ञात होती हैैैं।
राजराज प्रथम एक कुशल सैनिक के साथ-साथ एक महान निर्माता भी था जिसका ज्ञान उसके द्वारा तन्जौर में बनवाये गये राजराज मंन्दिर (अराध्यदेव शिव का मंन्दिर) से होता है।
चोल साम्राज्य का सर्वाधिक विस्तार राजेन्द्र प्रथम के शासन काल में हुआ था।
बंगाल के पाल शासक महिपाल को पराजित करने के बाद राजेन्द्र प्रथम ने गंगैकोण्ड चोल की उपाधि धारण की थी तथा इसके विजय के उपलक्ष्य में उसने गंगैकोण्डचोलपुरम नामक नयी राजधानी की स्थापना की।
राजेन्द्र प्रथम ने सिंचाई के लिये चोलगंगम् नामक विशाल तालाब का निर्माण करवाया। इस तालाब में उसने बंगाल से गंगा जी का जल ला कर डलवाया था।
राजेन्द्र प्रथम की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विजय दक्षिण एशिया में कडारम विजय था।
उसने कडारम के श्रीविजय शासक संग्राम कुलोतंुगवर्मन को पराजित किया।
राजेन्द्र प्रथम के तिरवालगांडु एंव करंदाई अभिलेख से उसके उपलब्धियों के बारे में जानकारी मिलती है।