पूर्व मध्यकाल-4 प्रान्तीय राज्य

प्रान्तीय राज्य

      जौनपुर की स्थापना फिरोज तुगलक ने 1359 में जौना खाँ (मुहम्मदबिन तुगलक) की स्मृति में किया।

      जौनपुर में स्वतंत्र शर्की वंश की स्थापना ख्वाजा जहाँ मलिक सरवर (मलिक-उस-शर्क) नामक हिजड़ा ने अन्तिम तुगलक शासक नासिरूद्दीन महमूद के समय किया।

      शर्की वंश में छः शासक हुए-मलिक सरवर, मुबारकशाह, इब्राहिमशाह, महमूदशाह, मुहम्मदशाह, हुसैनशाह (अन्तिम)

      मुबारकशाह ने सर्वप्रथम सुल्तान की उपाधि धारण किया।

      इब्राहिम शाही शर्की के समय जौनपुर को शिराज-ए-हिन्द कहा जाने लगा। इसने अटाला मस्जिद को पूर्ण करवाया एवं झंझरी मस्जिद का निर्माण करवाया। शर्की शैली का जन्म इसी के समय हुआ। यह शर्की वंश का महानतम शासक था। मैथिली कवि विद्यापति ठाकुर (कीर्तिलता रचना) को संरक्षण दिया।

      हुसैनशाह शर्की वंश का अन्तिम शासक था। इसी के समय में सिकन्दर लोदी में जौनपुर को दिल्ली में मिला लिया।

      जैनुलआब्दीन ने मुल्ला अहमद के द्वारा महाभारत एवं राजतरंगिणी का फारसी भाषा में अनुवाद करवाया।

      जोनराज ने राजतरंगिणी के द्वितीय भाग की रचना कर उसे 1458 ई0 तक आगे बढ़ाया। जोनराज के शिष्य श्रीवर ने राजतरंगिणी के तीसरे भाग की रचना किया।

      1586 में अकबर ने कश्मीर पर अधिकार कर लिया

      सुगन्धा देवी, जिसने आसीन लक्ष्मी की आकृति से मुक्त सिक्के चलाये कश्मीर की रानी थी।

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