पूर्व मध्यकाल-5 बंगाल

बंगाल

      पालवंश का संस्थापक गोपाल था जो 750ई0 में जनता की सहयोग से बंगाल का शासक बना। इस वंश की राजधानी मुँगेर (बिहार) थी।

      पालवंश का महान शासक धर्मपाल था। धर्मनिष्ठ बौद्व होने के कारण उसे परम सौगत उपाधि भी प्रदान की गयी थी। उसने विक्रमशीला विश्वविद्यालय की स्थापना की थी।

      बंगाल की राजधानी लखनौती को ‘विद्रोहो का नगर कहा जाता था।

      अलवर्दी खाँ ने अंग्रेजों की तुलना मधुमक्खियों से किया था।

      सिराजुद्दौला के समय में ब्लैकहोल (20 जून 1756, हालवेल द्वारा मनगढ़ंत घटना) और प्लासी का युद्ध (23 जून 1757 ई0) को हुआ।

      बक्सर का युद्ध 1764 ई0 बंगाल के नबाब मीरजाफर के समय लड़ा गया। इस विजय का श्रेय हेक्टर मुनरो को जाता है।

      बंगाल में स्वतंत्र राज्य की स्थापना मुहम्मद तुगलक के समय हाजी इलियास ने किया।

      गयासुद्दीन आजमशाह ने महारहन धर्मराज नामक बौद्ध भिक्षु को अपना दूत बनाकर चीनी सम्राट (1403) के दरबार में भेजा था।

      रूक्नुद्दीन बारबकशाह (1459-74)ई0 के समय में कृतिवास ने रामायण का बंगला भाषा में अनवुाद किया। जिसे बंगाल की बाइबिल या पंचमवेद कहा जाता है। उसने श्रीकृष्ण विजय के लेखक मालधर वसु को गुणराज खाँ की उपाधि देकर संरक्षण प्रदान किया।

      अलाउद्दीन हुसैन शाह (1493-1519) इसने कृष्ण का अवतार, नृपातिलक जगतभूषण एवं खलीफतुल्लाह की उपाधि धारण किया। यह चैतन्य महाप्रभु का समकालीन था। इसने बंगाल सत्यपीर नामक सूफी आन्दोलन की शुरूआत किया। मालधर वसु ने भागवत पुराण का श्रीकृष्ण विजय नाम से अनुवाद किया। इसने गौड़ के स्थान पर इकदला को राजधानी बनाया।।

      बाबर के आक्रमण के समय बंगाल का शासक नुसरतशाह (1519-32) था। उसी के समय में पुर्तगाली बंगाल में अपनी कोठी स्थापित किया। उसी के समय में काशीराम पंडित ने महाभारत का बंगला भाषा में अनुवाद किया।

      गुजराती कवि सोड्ढल ने धर्मपाल को उत्तरापथ स्वामी के उपाधि से संबोधित किया है।

      देवपाल ने प्रसिद्व बौद्व मठ ओदन्तपुरी का निर्माण करवाया।

      जावा के शैलेन्द्र वंशी शासक बलपुत्र देव के अनुरोध पर देवपाल ने नालन्दा में उसे बौद्व बिहार बनवाने के लिये पाँच गाँव दान में दिये।

      पाल शासक बौद्व धर्म के अनुयायी थे ।

      सेन वंश की स्थापना सामन्त सेन ने की थी।

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