कश्मीर
जैनुल आब्दीन (1420-70)
अपनी उदार नीतियों के कारण उसे कश्मीर का अकबर एवं मूल्य नियन्त्रण व्यवस्था के कारण उसे कश्मीर का अलाउददीन कहा जाता है।
वह जजिया को समाप्त करने वाला पहला शासक था। उसने सती प्रथा को पुनः प्रारम्भ करने की अनुमति दिया।
जैनुलआब्दीन ‘कुतुब’ उपनाम से फारसी में कविताएँ लिखता था।
सातवी शताब्दी में दुर्लभवर्द्धन नामक व्यक्ति ने कार्कोट वंश की स्थापना की।
कार्कोट वंश की ललितादित्य मुक्तापीड़़ ने कश्मीर के प्रसिद्ध मार्तंड मन्दिर(सूर्य मंन्दिर) का निर्माण करवाया था।
ललितादित्य मुक्तापीड़ ने कश्मीर मंे परिहासपुर नामक नये नगर की स्थापना की।
कश्मीर का दूसरा राज वंश उत्पल वंश था जिसका संस्थापक अवन्तिवर्मन था।
उत्पल वंश के बाद कश्मीर में लोहार वंश के शासकों ने शासन किया। इस वंश का संस्थापक संग्रामराज था।
लोहार वंश में रानीदिद्दा (उत्पल वंश की राजकुमारी) नामक शासिका भी हुयी थी।
कल्हण लोहार वंश के शासक हर्ष का दरबारी कवि था।
हर्ष को कश्मीर का ‘नीरो’ भी कहा जाता है।
कल्हण ने कश्मीर के इतिहास पर राजतरंगिणी नामक ग्रन्थ की रचना की थी।
कल्हण द्वारा रचित राजतरंगिणी को प्रथम भारतीय ऐतिहासिक कृति भी माना जाता है।