पूर्व मध्यकाल-9 कलचुरी वंश

कलचुरी वंश

      कलचुरी वंश का संस्थापक कोक्कल था।

      कलचुरी वंश का महान शासक कर्ण था जिसने कंलिग विजय किया था और त्रिकलिंगाधिपति की उपाधि धारण की।

      प्रसिद्व कवि राजशेखर कंलचुरि दरबार में रहते थे।

मेवाड़ का सिसोदिया वंश

      राणाकुम्भा का वास्तविक नाम कुंभकर्ण (1433-68ई0) ने 1437 ई0 में मालवा के शासक महमूद खिलजी को पराजित कियां इसी विजय के उपलक्ष्य में चितौड़ में कीर्तिस्तम्भ का निर्माण करवाया जिसे हिन्दूदेवशास्त्र का कोष कहा जाता है।

      राणा कुम्भा स्वयं विद्वान था। उसने जयदेव कृति ‘गीतगोविन्द’ पर रसिकप्रिया नामक टीका लिखा।

      राणाकुम्भा एक महान संगीतकार व कुशल वीणावादक था उसने संगीतशास्त्र पर संगीतराज, संगीतमीमांसा, संगीत रत्नाकर व सुरप्रबन्ध आदि की रचना किया।

      राणा सांगा (1508-28ई0) ने 1517 में खतौली के युद्ध में इब्राहिम लोदी को पराजित किया।

      1527 में खानवा के युद्ध में बाबर ने राणा सांगा को पराजित किया। इसी युद्ध में बाबर ने जेहाद की घोषणा किया था।

      सिसोदिया वंश के राणाकुंभा ने अपनी मालवा विजय के उपलक्ष्य में चित्तौड़ में विजय स्तम्भ का निर्माण करवाया था।

      खतौली का युद्व 1518ई0 में राणासांगा एवं इब्राहिम लोदी के बीच हुआ।

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