हृदय की संरचना

  • हृदय वक्ष की बाईं ओर स्थित त्रिकोणीय पेशी रचना में युक्त एक दोहरी भिक्ति वाला झिल्ली नुमा थैली में बंद होता है जिसे पेरीकार्डियम कहा जाता है इसका भार लगभग 300 ग्राम होता है
  • मनुष्य हृदय 4 कोष्ठो में बटा होता है ऊपर वाले 2 कोष्ट आलिंद तथा नीचे वाले दो कोष्ठ निलय कहलाते हैं
  • दाया आलिंद महाशिरा से रुधिर प्राप्त करता है तथा  बायां आलिंद फुप्फुसीय शिरा से ऑक्सीजन युक्त रक्त प्राप्त है। 
  • आलिंद से निलय में रुधिर छिद्र द्वारा पहुंचता है जिस पर वाल्व होते हैं वाल्व रुधिर को विपरीत दिशा प्रवाहित होने से रोकता है
  • हृदय की मांसपेशियों को रक्त पहुंचाने वाली वाहनी को कोरोनरी धमनी कहते हैं इसमें किसी प्रकार की रुकावट होने पर हृदय आघात होता है
  • एक स्वस्थ मनुष्य में हृदय की धड़कन  सामान्य अवस्था में 1 मिनट 72 बार कड़ी मेहनत करने पर 180 बार धड़कता है
  • हृदय एक पंप की भांति कार्य करता है या विशेष प्रकार की पेशी ऊतक का बना होता है जिसे हृदय पेशी उत्तक कहते हैं
  • हृदय शिराओं द्वारा रक्त को ग्रहण करता है और धमनियों द्वारा रुधिर को शरीर के विभिन्न भागों में भेजता है
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