1. सरकार को साइबर अपराध और साइबर युद्ध के बीच एक स्पष्ट अंतर परिभाषित करना चाहिए और तदनुसार राज्य की प्रतिक्रिया एवं भूमिका निर्धारित करनी चाहिए।
2. भारत को अपने वास्तविक खतरों को चिन्हित करना होगा और इससे यह भी निर्धारित करना होगा कि साइबर हमलों को रोकने के लिए तथा सुरक्षा प्रदान करने के लिए किस तरह की प्रतिक्रिया एवं कार्यवाही की आवश्यकता है।
3. राष्ट्रीय सरकारी एवं निजी प्रणालियों जियो कि वास्तव में महत्वपूर्ण है को परिभाषित करना होगा और साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन प्रणालियों को हमले से बचाया जा सके किसी भी आपातकाल की स्थिति में इन प्रणालियों का विकल्प उपलब्ध होता था इन प्रणालियों को शीघ्रता से पुनर्गठित किया जा सके।
4. साइबर सुरक्षा के लिए केंद्र एवं राज्य स्तर पर समन्वयक नीतियों की समीक्षा भविष्य की योजना प्रोग्राम बजट और इस तरह के कामों की वार्षिक आवृत की आवश्यकता है।
5. साइबरसाइबर जोखिम तथा महत्वपूर्ण साइबर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा क्षमता का नियमित रूप से स्वतंत्र ऑडिट किया जाना चाहिए
6. रक्षा मंत्रालय गृह मंत्रालय के अंतर्गत एक ऐसी सुपरिभाषित केंद्रीय संस्था होनी चाहिए जो साइबर युद्ध के खिलाफ लड़ने में विदेशी राज्यों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जाने वाले हमलों का जवाब देने में और आतंकवादियों एवं अतिवादियों से निपटने में प्रशिक्षित एवं सुसज्जित हो।