पुरा−पाषाणकाल

    पुरा−पाषाणकाल:− इस काल का मानव प्रकृति निर्मित गुफाओं में वास करता था। तथा वह पत्थर,लकड़ी एंव हड्डी के बने भद्दे अवजारों का प्रयोग करता था।
    महाराष्ट्र में जलगाँव के समीप पटणें नामक स्थान पर शुतुरमुर्ग के अण्डे के खोल पर आड़ी-तिरछी रेखाओं द्वारा चित्रकारी का साक्ष्य मिला है। 
    जोकि पुरापाषाण काल के अन्तिम चरण अर्थात उच्च पुरापाषाण काल का द्योतक है। उच्च-पुरापाषाण काल ही मानवीय विकास का पहला चरण है, जहाॅ उसने चित्रकारी प्रारम्भ की।
    उत्तर-प्रदेश के बेलन नदी घाटी के क्षे़त्र में इलाहाबाद के मेजा क्षेत्र में लोहदा नाले से एक हड्डी की नारी आकृति प्राप्त हुयी है,जिसे विद्वानों ने हारपून कहकर संबोधित किया। यह उच्च- पुरापाषण काल की थी। 
    प्रो0 D.P.S दारिकेश ने मध्य-प्रदेश के मोरेना जनपद के पहाड़गढ़ शिहोंरपुर से 25000 ईसा पू0 के चित्र प्राप्त किये है,जो गेरूए और सफेद रंग के है। इनके विषय शिकार एंव शिकारी है। 
    पुरा-पाषण काल का मानव सामान्य क्वार्टजाइट पत्थर के उपकरणों का प्रयोग करता था। इसलिए उसे क्वार्टजाइट मानव भी कहा गया है। 
    पुरा-पाषाणकालीन मानव सोहन नदी घाटी,नर्मदा नदी घाटी,साबरमती घाटी,उड़ीसा,कर्नाटक,मद्रास तथा आन्ध्रप्रदेश के गुन्टूर कुड़प्पा आदि क्षेत्रों में रहता था।
    प्रागैतिहासिक मानव के अधिकांश साक्ष्य ज्यादातर दक्षिण भारत से ही मिले है। इसी कारण भूर्गभ शास्त्रियों का मानना है कि दक्ष्णि भारत ही देश का सबसे प्राचीन भाग है,जो मानव का निवास स्थान बना।
 
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