मध्य प्रदेश के शैल चित्रकला के केन्द्र−
पंचमढ़ी:− यह स्थान महादेव पर्वत श्रृंखला में अवस्थित है। पंचमढ़ी के आसपास कोई 5 मील के घेरे में 50 के करीब दरियाँ(गुहाएँ) है। इन सभी में महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक चित्र उपलब्ध है।
नोट:− पंचमढ़ी की खोज 1932 ई0 में जी0आर0 हन्टर ने की थी।
पंचमढ़ी क्षेत्र के चित्रों को प्रकाश में लाने का श्रेय क्ण्भ्ण्गार्डेन को है। जिन्होंने सन् 1936ई0 में यहाॅ के चित्रों के संबंध में रेखाचित्रों तथा फलक चित्रों सहित एक विशद लेख प्रकाशित किया।
यहाॅ पर प्रमुख निम्नलिखित चित्र प्राप्त हुए है-
1. इमली खोह में सांभर के आखेट का दृश्य
2. भाडादेव गुफा की छत पर शेर के आखेट का दृश्य
3. महादेव बाजार में विशालकाय बकरी का दृश्य
यहाॅ के अन्य चित्र-गाय चराते चरवाहे,शहद इकट्ठा करते हुए लोग,हाथी पर सवार भैंसे का शिकार करते हुए शिकारी,गर्धमुख देवता,सितार वादन, नृत्यवादन,सशस्त्र युद्ध एवं दैनिक जीवन के चित्र चित्रांकित है।
लसखरियाखोह,बनियावेरी,सोनभद्र,जम्बूद्वीप,निम्बू भोज,झलाई,कजरी अन्य स्थल क्षेत्र है।
यहाॅ के चित्र तीन स्तरों में प्राप्त होते है-
1. पहले स्तर में तख्तीनुमा व डमरूनुमा मानव आकृतियों को बनाया गया है। शारीरिक गठन लहरदार रेखाओं एंव लाल (गेरू) पीले रंगों की अधिकता है।
2. दूसरे स्तर में वे चित्र आते है,जिनमें आकृतियों का रूपविन्यास बेडौल,ओजपूर्ण एवं असंतुलित है।
3. तीसरे स्तर में आकृतियाँ स्वाभाविक बन पड़ी है।