भारत स्वतंत्रता आंदोलन में वामपंथी राजनीति का उदय

1917 ई. में रूसी क्रांति की सफलता ने संपूर्ण विश्व में समाजवादी विचारधारा को लोकप्रिय बनाने का कार्य किया। भारत में धीरे - धीरे मार्क्सवादी समाजवादी विचारधारा लोकप्रिय हो रही थी। कांग्रेस के अंदर भी वामपंथी राजनीति को प्रोत्साहन मिला। इस प्रोत्साहन के सूत्रधार जवाहरलाल नेहरू थे। जवाहरलाल नेहरू को 1926 में उन्हें औपनिवेशिक उत्पीड़न तथा साम्राज्यवाद के खिलाफ ब्रुसेल्स में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कांग्रेस के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होने का मौका मिला। यहां पर उन्हें ' लीग अगेंस्ट इंपीरियलिज्म एंड फॉर नेशनल इंडिपेंडेंस ' की कार्यकारिणी समिति का सदस्य नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्होंने सोवियत रूस का भी दौरा किया जहां वे सोवियत सरकार के विकास कार्य से काफी प्रभावित हुए। अब उन पर समाजवाद का गहरा प्रभाव था।

* इन्हीं विचारधाराओं के तले उन्होंने 1929 के लाहौर अधिवेशन की अध्यक्षता की स्पष्ट रूप से घोषित किया कि मैं समाजवादी हूं। 1937 के लखनऊ अधिवेशन में इन्होंने घोषित किया कि समाजवादी ही सभी समस्याओं की कुंजी के समान है।

* नेहरू को कांग्रेस के अंदर समाजवादी विचारधारा के प्रसार में सुभाष चन्द्र बोस जैसे मजबूत सहयोगी का साथ मिला। अगस्त 1928 ई. में दोनों नेताओं ने मिलकर कांग्रेस के अंदर एक प्रभावक गुट के रूप में एक नई पार्टी " इंडिपेंडेंस फॉर इंडिया लीग " की स्थापना की।

Posted on by