बाँदा क्षेत्र के प्रमुख स्थल
बाँदा क्षेत्र विन्ध पर्वत श्रृृखला के अंतर्गत आता है,इस क्षेत्र में सर्वप्रथम शैल चित्रों की खोज का काम शिलवेराय द्वारा किया गया।
इस क्षेत्र में सरहत, करियाकुंड, करपरिया, (तीनों मानिकपुर क्षेत्र में) मलवा,अमवा, (चित्रकूट जिला) वरगढ़ आदि है।
सरहत:− यहाँ पर तीन अश्व का गेरू रंग द्वारा ओजपूर्ण अंकन है। यही पर एक सुसज्जित द्वार पर चोचदार पुरूष को बैठा दिखाया गया है। शायद यह कोई तंत्र-मंत्र शाला रही होगी।
करियाकुंड:− इसमें बारहसिंगा का पीछा करते धर्नुधारियों का मनोहारी दृश्य अंकित है।
इस क्षेत्र में (मानिकपुर) गेरूये रंग में पहिए रहित गाड़ी और तीन घोड़ों का अंकन मिला है।
मलवा:− यहाॅ पर पहिए रहित गाड़ी पर एक बैठे हुए व्यक्ति का चित्र (नंगा) तथा उसके दोनों ओर दो अनुचर धनुषवाण तथा दण्ड लिए खड़े है।
मलवा के एक चित्र में तीन दण्डधारी,अश्वारोही का अपने-अपने घोड़े की रास पकड़े एक ही दिशा में पैदल चलते दिखाया गया है।
विहार क्षेत्र:− विहार के चक्रधरपुर,शाहाबाद,सिंहनपुर क्षेत्र से गुफाओं में लेटी एंव शिकार करती मानव आकृतियाँ मिली है।
राजस्थान क्षेत्र:− इसमेें चम्बल क्षेत्र में दिल्ली,मुम्बई मार्ग पर कोटा से 22 किमी0 दूर अलनिया नदी घाटी में शैलाश्रय में चित्र प्राप्त हुए है।
ये चित्र ईसा से 5000 वर्ष पूर्व के है,जो गेरू रंग में चित्रित है। यहाॅ पर पशु के शिकार का दृश्य व मानव आकृतियों के चित्रों की भरमार है।