अजन्ता की भित्ति चित्रण विधि:− अजन्ता में तैयार करने के लिए खड़ियाँ, चूना, गोबर, चोकर, धान की भूसी, बारीक बजरी, अलसी का पानी, उड़द की दाल का पानी आदि मिलाकर रख दिया जाता है। इस गारे के फूल जाने के बाद छत या दीवार की सतह पर 3/4 से लेकर 1इंच तक मोटा प्लास्टर चढ़ा दिया जाता था। प्लास्टर के ऊपर से अण्डे के छिलके के मोटाई के बराबर चूने का लेप किया जाता था, इसके ऊपर चित्रकारी की जाती थी।
गीले प्लास्टर पर ही लाल रंग के रेखाओं से रेखांकन किया जाता था, फिर स्थानीय रंग भरे जाते थे।
सीमा रेखाएँ काले या भूरे रंग से बनायी जाती थी।
आवश्यकतानुसार छाया का प्रयोग किया जाता था, जैसे-ठुड्डी के नीचे गहरे रंग का वास लगाकर गोलाई को उभारा जाता था।
गोलाई दिखाने के लिए यथार्थ छाया या प्रकाश का प्रयोग न करके बल्कि बिरोधी रंग या काले रंग के प्रयोग द्वारा आकृति को निश्चित रूप दिया जाता था।
चित्रों को बनाने के लिए फ्रेस्को और टेम्परा दोनों विधियों का प्रयोग किया जाता था। फ्रेस्को विधि के तहत गीली सतह पर रंग और ब्रश के माध्यम से चित्र बनाये जाते थे।
टेम्परा विधि के तहत सूखी सतह पर बन्धक पदार्थो (काटन, अण्डे की जर्दी, रंग, खड़ियाँ, चोकर आदि) के साथ मिले रंगों की मदद से चित्र बनाये जाते थे।
अधिक बारीकी से कटी मूर्तियों में मिट्टी के प्लास्टर का उपयोग किया गया है।