तेजस

हाल ही में भारतीय वायुसेना (IAF) के तेजस एमके-1 के लिये हवा में ईंधन (तरल ईंधन) भरने का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उल्लेखनीय है कि इस परीक्षण से पहले शुष्क ईंधन परीक्षण का कार्य 04 और 06 सितंबर, 2018 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया था। 

हवा में ईंधन भरने की इस सफलता से IAF के हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) की क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी। इससे हवा में लंबे समय तक विमान का परिचालन किया जा सकेगा।
यह एक ‘स्वदेशी हल्का लड़ाकू विमान’ (Indigenous Light Combat Aircraft) है, जिसे ‘वैमानिकी विकास एजेंसी’ (Aeronautical Development Agency - ADA) तथा ‘हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड’ (Hindustan Aeronautics Limited - HAL) के द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। 
रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के अधीन कार्यरत ‘ए.डी.ए.’, एल.सी.ए. के डिज़ाइन तथा विकास के लिये एक नोडल एजेंसी है। जबकि HAL, DRDO और CSIR प्रयोगशालाओं, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्योगों तथा शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी के साथ एलसीए कार्यक्रम का प्रमुख भागीदार है। 
यह सबसे छोटे-हल्के वज़न का एकल इंजन युक्त ‘बहु-भूमिका निभाने वाला एक सामरिक लड़ाकू विमान’ (Multirole tactical fighter aircraft) है। 
गौरतलब है कि इसे रूस के Mig-21 लड़ाकू विमानों पर अपनी निर्भरता को कम करने तथा स्वदेशी युद्धास्त्रों के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की ओर बढ़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

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