यंग - बंगाल आंदोलन

यंग बंगाल का प्रारंभ 19वीं शताब्दी के अत्यंत विलक्षण व्यक्ति हेनरी लुई विवायन डेरोजियो द्वारा किया गया। डरोजियों 1826 में कलकत्ता आए और अंग्रेजी साहित्य तथा इतिहास के शिक्षक के रूप में हिन्दू  कॉलेज में उनकी नियुक्ति हुई। इसके अतिरिक्त उन्होंने हैस्पेरस तथा कलकत्ता साहित्यिक गजट का भी संपादन किया। वह इंडिया गजट से भी संबद्ध रहे। डेरोजियों ने हिंदू कॉलेज के छात्रों को अपने व्यक्तित्व के प्रति आकर्षित किया तथा कक्षा के भीतर और बाहर, दोनों ही जगह अपने शिष्यों पर उनका अभूतपूर्व प्रभाव पड़ा। उन्होंने सत्य के लिए जीने और मरने, सभी सद्गुणों को अपनाने और उनके अनुसार आचरण करने तथा हर तरह से बुराई से बचने के लिए उन्हें प्रेरित किया। उन्होंने सामाजिक, नैतिक तथा धार्मिक सभी विषयों पर मुक्त परिचर्चा पर अत्यधिक बल दिया। 

डेरोजियो उन गिने - चुने अध्यापकों में थे, जिनके ज्ञान, सत्यनिष्ठा और बुराई से घृणा की प्रवृत्ति का उनके संपर्क में आने वाले युवकों पर गहरा प्रभाव पड़ा। सुकरात के समान ही उन्होंने सत्य का अनुसरण किया और उन पर युवकों को गुमराह करने का दोष लगाया गया। कुछ प्रभावशाली लोगों ने उन्हें नौकरी से निकलवा दिया। इसके कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई।

Posted on by