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सन् 1674 में एन्टोनी वॉन ल्यूवेनहॉक ने अच्छी किस्म के लेन्सों से जब अनेक पदार्थों (कीचड़, दांत की खुरचन, आदि) को देखा तो उनमें उन्हें अनेक छोटे-छोटे प्राणि घूमते-फिरते दिखाई दिए। ये इतने छोटे जीव होते हैं कि हमारे आस-पास अरबों-खरबों की संख्या में होते हैं फिर भी हमें दिखाई नहीं पड़ते – बिना लेन्स के। इनमें से अधिकांस केवल एक ही कोशिका के बने होते हैं। जीवन की सारी क्रियाएं, यहां तक कि सन्तानों को जन्म देने का कार्य भी, यही एक कोशिका करती है। अतः दो तरह के जीवधारी हुए :
- एक कोशिकीय (Unicellular) – जिनका शरीर केवल एक ही कोशिका का बना होता है और केवल एक ही कोशिका सभी जैविक कार्य करती है। उदाहरण – अमीबा, पैरामीशियम ।
- बहुकोशिकीय (Multicellular) – जिनका शरीर अनेक कोशिकाओं का संगठन है। मनुष्य, कुत्ता, गुलाब का पौधा, आम का पेड़ आदि सभी बहुकोशिकीय जीवधारी है।
जीव जगत के संगठन का सबसे महत्वपूर्ण व मूल स्तर कोशिकीय स्तर है। कोशिकीय संगठन से ही जैव जगत के संगठन का आरम्भ होता है।
कोशिका कितनी बड़ी होगी, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसका कार्य क्या है? प्रायः कोशिकाएं इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें देखने के लिए सूक्ष्मदर्शी की आवश्यकता पड़ती है। इनको मापने के लिए भी एक बहुत छोटी इकाई का प्रयोग करते हैं जिसे माइक्रॉन या माइक्रोमीटर (micron or micrometer, µm) से प्रकट किया जाता है। 1µm = 10-3 mm = \[\frac{1}{1000}mm\] । यहा mm मिलीमीटर बताता है। इसे मिमी भी लिखते हैैं। प्रायः कोशिकाएंं 10 µm \[(=\frac{1}{100}mm)\] से लेकर 100µm \[(=\frac{1}{10}mm)\] तक की माप की होती हैं।
अभी आगे जारी है ..