एलिसा टेस्ट एक उत्प्रेरक पदार्थ को लेकर नैनो ग्राम स्तर तक रोग कारकों को पहचान के लिए उपयोग में लाई जाने वाली तकनीक है इसमें अब सोच मात्रा में रसायनों का उपयोग किया जाता ।
आज के जमाने में सर्वाधिक प्रचलित एड्स जैसी बीमारी हो, कैंसर के द्वारा दी जाने वाली कीमोथैरेपी का प्रयोग हो या नशा के रूप में उपयोग में आने वाले मार्फिन की जांच हो , इन सब के लिए एलिसा टेस्ट सबसे कारगर है।
1. एलिसा परीक्षण में व्यक्ति के सीरम को 400 गुना तनु किया जाता है और एक ऐसी प्लेट पर लगाया जाता है जिस पर HIV एंटीजन लगे होते हैं।
2. यह द्वितीयक एंटीबॉडी पहले से एक अनजान से रासायनिक रूप से बाधित होती है।
3. इस तरह प्लेट में उससे बंधित द्वितीयक एंटीबॉडी की मात्रा के अनुपात में एंजाइम होता है एंजॉय के लिए एक शब्द स्ट्रेट लगाया जाता है और एंजाइम के उत्प्रेरण से रंगिया प्रतिदीप्त में परिवर्तन हो जाता है।
अनुप्रयोग-
1. खाद उद्योग में यह विभिन्न खाद्य पदार्थों जैसे कि दूध मूंगफली, अखरोट ,बादाम और अंडे के रूप में संभावित खाद एलर्जी कारकों का पता लगाने में प्रभाव कारी है।
2. एलिसा का उपयोग विश्व विज्ञान में कुछ खास वर्ग की दवाओं में तीव्र प्रकल्पित स्क्रीन के रूप में भी किया जा सकता है।
3. एलिसा तपेदिक में माइकोबैक्टीरियम एंटीबाडी का पता लगाने में इस्तेमाल किया जाता है।
4. एलिसा का इस्तेमाल मल में रोटावायरस का पता लगाने में किया जाता है।