महमूद गजनबी

महमूद गजनबी

      महमूद गजनबी 998ई0 में गद्दी पर बैठा। वह सुवुक्तगीन का पुत्र था। उसका भारत पर आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन लूटना था।

      महमूद गजनबी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किये।

      1021-22 में महमूद ने पंजाब पर अधिकार कर लिया। महमूद ने पंजाब में प्रचलित शाही सिक्के को ही अपनाया। उसके अपने सिक्कों पर ‘घुड़सवार तथा नन्दी’ चिन्ह जो पहले से प्रचलित था, को अपनाया और उस संस्कृत भाषा में ‘आत्यक्तमेकं अवतार महमूद’ खुदवाया और टकसाल का नाम भी अंकित करवाया। मुस्लिम शासकों सर्वप्रथम महमूद ने ही भारतीय ढंग के सिक्के ढलवाया। उसके द्वारा प्रचलित सिक्के ‘दिल्लीवाल’ (56 ग्रेन) के नाम से प्रसिद्ध थे।

      महमूद गजनवी ने अपनी बहुजातीय सेना में हिन्दुओं को भी नियुक्त किया था।

      महमूद का शाही इतिहासकार उत्बी था जिसने किताब-उल-यामनी लिखा।

      फिरदौसी (पूर्व का होमर)-शाहनामा

      अल्बरूनी (अरबी भाषा में किताब-उल-हिन्द) पुराणों का अध्ययन करने वाला पहला मुसलमान था।

      बैहाकी-तारीखे-सुबुक्तगीन

      महमूद गजनबी ने 1026 ई0 में सोमनाथ के मन्दिर को लूटा था। सोमनाथ का मन्दिर शैव मन्दिर था। वहाँ का शासक भीमदेव था जो बिना युद्ध किये भाग गया।

      महमूद गजनवी द्वारा हिन्दू मंन्दिरों और मूर्तियों को तुड़वाने के कारण उसे बुतशिकन भी कहा जाता है।

      महमूद गजनवी का अन्तिम आक्रमण 1027 ई0 में जाटों के विरूद्व था।

      महमूद गजनवी की मृत्यु 1030 ई0 मंे हुयी थी।

      अलबरूनी, फिरदौसी, उत्बी तथा फारूखी महमूद गजनी के दरबार में रहते थे।

      महमूद गजनवी ने 1001 ई0 हिन्दीशाही वंश के राजा जयपाल पर आक्रमण किया इसमें जयपाल पराजित होने के बाद आत्महत्या कर लिया।

      हिन्दूशाही वंश की राजधानी उद्भाण्डकर (वैहिन्द) थी।

      1018 ई0 में मथुरा और वृन्दावन पर आक्रमण

      विद्याधर चन्देल ही अकेला एकमात्र भारतीय नरेश था जिसने महमूद गजनवी की महत्वाकांक्षाओं का सफलता से प्रतिरोध किया।

Posted on by