शारदा चरण उकील (1888-1940 ई0)
जन्म:- इनका जन्म 1888 ई0 में हुआ था। जन्म स्थान:- ढांका या विक्रमपुर (बंग्ला देश)
मृत्यु:- इनकी मृत्यु 1940 ई0 में हुई।
गुरू:- अवनीन्द्रनाथ टैगोर।
श्रृंखला:- बुद्ध के जीवन पर चित्र श्रंृखला।
अवनीन्द्रनाथ टैगोर से शिक्षा प्राप्त कर दिल्ली आये और एक स्कूल- 1926 ई0 में शारदा उकील स्कूल आॅफ आर्ट्स की स्ािापना की,जिसमें अनेक नवीन शैली का प्रचार किया गया। (ममता चतुर्वेदी)
इनकी शैली में ठाकुर शैली के अतिरिक्त मुगल तथा ईरानी शैलियों की भी छाप है।
ऐतिहासिक तथा पौराणिक विषयों का चित्रण जिसमें कृष्ण तथा बुद्ध की प्रधानता है।
रेशम पर भी अनेक चित्र बनाये।
चित्रों मंे अधिक रंगों का प्रयोग न करके मात्र दो या तीन रंगों से ही चित्र पूर्ण किये है।
दिल्ली मंे रूपलेखा नामक पत्रिका का प्रकाशन आरम्भ किया जो अब आल इण्डिया फाइन आर्ट्स एण्ड क्राफ्ट्स नई दिल्ली के द्वारा प्रकाशित की जा रही है।
इनके मझले भाई वारदा उकील इस सोसायटी के व्यवस्थापक तथा इस पत्रिका के सम्पादक बने।
प्रमुख चित्र:- जटायु की मृत्यु, राधा-कृष्ण, वंशीवादक गोपाल, ईद व दूज के चाँद, संदेश, प्रेम पीड़ित विरहणी, जर्जर भिखारी।
नोट:- प्रेम पीड़ित विरहणी (नारियों), जर्जर भिखारी आदि का गहन, करूण व संवेदना को अस्पष्ट रेखाओं व धुंधले रंगों द्वारा उभारा।