मगध की सफलता के कारण

इस काल मैं भारत के सबसे बड़े राज्य की स्थापना बिंबसार अजातशत्रु और महपदमंनद जैसे कई साहसी और महत्वकांछि साशको के प्रयासों से हुई । 

 लौह युग में मगध की भौगोलिक  स्थिति बहूत उपयुक्त थी क्योंकि लोहे के समृध भंडार मगध की आरंभिक राजधानी राजगीर से बहुत दूर नहीं थी । समृद्ध लौह खनिज भंडार के समीपतम सुविधा के कारण मगध के शासक अपने लिए प्रभावशाली हथियार तैयार करा सके ।मगध की दोनों राजधानियाँ प्रथम राजगिर और दूसरी पटिलपुत्र सामरिक दृष्टि से अत्यंत ही महत्वपूर्ण स्थानों पर थी ।  राजगीर 5 पहाड़ियों की श्रंखला से घिरा था इसलिये वह दुर्बेघ था । प्राचीन बौध ग्रंथो से ज्ञात होता है की एस प्रदेश मैं अनेक प्रकार के चावल पैदा होते थे ।प्रयाग से पश्चिम के क्षेत्र की अपेक्षा यह प्रदेश  कही अधिक उपजाउ था ।

यहाँ के किसान पर्याप्त अनाज पैदा कर लेते थे और भरण पोषण के बाद भी उनके पास पर्याप्त अनाज बचता था ।शासक कर के रूप में ईस अतिरिक्त उपज को एकत्र कर लेते थे। मगध के शासकों ने नगरों के उत्थान और धातु के बने सिक्कों का प्रचलन से भी लाभ उठाया ।सैनिक संगठन के विषय में मगध को एक विशेष सुविधा प्राप्त थी । भारतीय  राज्य घोड़े और रथ के उपयोग से भलीभाँति परिचित थे , कितु मगध ही पहेला राज्य था जिसने  अपने पड़ोसियों के विरुद्ध युद्ध में हाथियों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया । यूनानी स्रोतों से ज्ञात होता है कि नन्दों की सेना में ,6000 हाथी  थे ।

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